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तो फिर जज क्यों नहीं कर सकते अवैध निर्माण?

नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट ने वीआईपी सरकारी बंगलों में अवैध निर्माण को तोड़ने में विफलता के लिए सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या ये सभी वीआईपी कानून के ऊपर हैं ? यदि ऐसा है तो जजों और आम आदमी को भी अवैध निर्माण की इजाजत दी जानी चाहिए।

चीफ जस्टिस एमके शर्मा और जस्टिस संजीव खन्ना की डिवीजन बेंच ने बुधवार को नगरीय विकास मंत्रालय को दिल्ली के लुटियंस जोन के बंगलों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा कि दिशा-निर्देशों का पालन सबसे ऊपर शुरू होना चाहिए। कोर्ट ने 16 जनवरी तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

मामला क्या है : कोर्ट ने 2004 में इन मीडिया रिपोर्टे पर स्वप्रेरित संज्ञान लिया था कि भवन उपनियमों का उल्लंघन करके सरकारी बंगलों में अवैध निर्माण कराया जा रहा है। मंत्रालय ने 2006 में लुटियंस जोन के टाइप-7 और टाइप-8 बंगलों के लिए दिशा-निर्देशों में संशोधन कर दिया। इसके तहत गैरेज, सर्व्ेट क्वार्टर और सुरक्षा कर्मियों के लिए कमरों का निर्माण कराया जा सकता है। इसके बाद संपदा निदेशालय के सर्वे में पाया गया कि 71 बंगलों में संशोधित दिशा-निर्देशों का पालन भी नहीं किया गया है।

सिर्फ 16 बंगलों पर चला बुलडोजर :
केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के अधिकारी कोर्ट के बार-बार निर्देशों के बावजूद सिर्फ 16 बंगलों के अवैध निर्माण तोड़ सके हैं, जबकि बाकी 55 के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं।

ये वीआईपी भी हैं कठघरे में :
लालू प्रसाद, रामविलास पासवान, प्रफुल्ल पटेल, अमर सिंह, सुषमा स्वराज, गुलाम नबी आजाद, उमर अब्दुल्ला, अजय माकन, केपीएस गिल और प्रतिपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी।





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