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दीक्षा देकर विदा हुए बापू

ग्वालियर.bapu संत श्री आसाराम आश्रम के तत्वावधान में मेला ग्राउंड पर आयोजित संत आसाराम बापू के दो दिवसीय भागवत सत्संग समारोह के अंतिम दिन बुधवार को भक्तों की खासी भीड़ रही। दीक्षा समारोह में संतश्री से करीब पांच हजार भक्तों गुरु दीक्षा ली।

इसके बाद प्रवचन प्रारम्भ हुए। प्रवचन सुनने के लिए क्षेत्रीय सांसद यशोधरा राजे सिंधिया भी पहुंचीं और उन्होंने बापू की वंदना कर पुष्पहार अर्पित किया।

भक्तों को आशीर्वचन देते हुए बापू ने कहा कि मानव का जन्म लेकर जीव भगवान को भी प्राप्त कर सकता है और 84 लाख योनियों में भी भटक सकता है। मानव योनि जीव की मध्य की अवस्था है, जिससे जीवात्मा ऊध्र्वगामी और अधोगामी दोनों ओर जा सकती है। भगवान राम के गुरु वशिष्ठ और भगवान कृष्ण के गुरु संदीपनि का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि वशिष्ठ और संदीपनि मानव होते हुए भी सृष्टि के सृजनकर्ता के गुरु थे। यह मानव की योग्यता की निशानी है।

उन्होंने कहा कि सत्य का संग कराने की व्यवस्था का नाम ही धर्म है। धर्म और अधर्म में दस-दस विशेषताएं होती हैं। धर्म में क्षमा, धैर्य, अस्तेय, शौच, इन्द्रिय निग्रह, ध्येय, वैदिक विद्या, सत्य आदि और अधर्म में दुष्टों का संग, पाप में रुचि, अजितेन्द्रिय, स्वार्थी प्रवृत्ति, लोभ, कृपणता, दूसरों को दुख पहुंचाने की प्रवृत्ति, कामी प्रवृत्ति आदि विशेषताएं होती हैं। सत्संग द्वारा व्यक्ति का कल्याण हो सकता है।

संतश्री ने राजा बलि की कथा सुनाते हुए कहा कि राजा बलि पूर्व जन्म में शराबी थे, लेकिन केवल डेढ़ पल के सत्संग के प्रभाव के कारण महादानी राजा बलि हो गए। सत्संग के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए संत आसाराम बापू ने कहा कि सत्संग के कारण राजा बलि के आगे न केवल स्वयं नारायण को भीख मांगनी पड़ी, बल्कि उनकी अर्धागिनी माता लक्ष्मी को भी हाथ पसारना पड़ा। आध्यात्मिक उन्नति के बिना भौतिक उन्नति संभव नहीं है। आध्यात्मिक उन्नति से जीवन में मधुरता आती है।

मेरे सुख के आगे राष्ट्रपति के सुख भी तुच्छ
बापू ने कहा कि मेरे सुख के आगे बड़े-बड़े राजा, महाराजा, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को प्राप्त सुख भी तुच्छ हैं। मेरा सुख शाश्वत है, जो बिना कारण के सदैव हंसता रहता है। किसी के पास है, ऐसा सुख? व्यक्ति को शाश्वत सुख की प्राप्ति हेतु ही सदा प्रयत्न करते रहना चाहिए।

कैसे हैं हालचाल?
स्थानीय मेला ग्राउण्ड में नौ अक्टूबर से सुबह शाम चले दो दिवसीय भागवत सत्संग समारोह में भक्तों के भारी सैलाव को देखकर बापू ने ग्वालियरवासियों से विनोदी तरीके से हालचाल पूछे, जिसे सुनकर सभी भक्त बरबस हंस पड़े।

लाफिंग क्लब दैत्य क्लब
बापू ने हंसी के तीन प्रकार दैत्य-दानव हंसी, देव -मानव हंसी और संत-भगवंत हंसी को विस्तार से बताते हुए कहा कि संत-भगवत हंसी में व्यक्ति अंतरात्मा से हंसता है। कभी दुखी होता ही नहीं है। हंसी का कारण हो यह आवश्यक नहीं।

देव-मानव हंसी कारण सहित हंसी होती है, इसमें व्यक्ति स्वयं भी हंसता और दूसरे को भी उसमें शामिल करता है, जबकि दैत्य-दानव हंसी में हंसने का आडम्बर होता है, जिसे हंसना न कहकर अट्टहास कहा जाता है, जिसमें घमंड होता है, थोथापन होता है। रावण, कंस की हंसी दैत्य-दानव हंसी थी।

इसी प्रकार लाफिंग क्लब के लोग भी नकली हंसी हंसते हैं, जिसमें अन्दर से किसी भी प्रकार की प्रसन्नता नहीं होती है, बल्कि हंसने का अभिनय किया जाता है। भारत की दैत्य हंसी पाश्चात्य देशों से लौटकर आने के बाद लाफिंग हंसी में परिवर्तित हो गई।

जाओ बाबा अब क्यों खड़े हो
सुबह के सत्र के प्रवचन समाप्त होने के बाद जब श्रद्धालुओं की भीड़ पंडाल में संत आसाराम बापू ने देखी तो उन्होंने भक्तों से अपने-अपने घर जाने को कहा, जिसे सुनकर श्रद्धालु मंच के और समीप आ गये और बापू के जयकारे लगाने लगे।

बापू के बार-बार कहने पर भी जब भक्त पण्डाल छोड़ कर नहीं गए तो बापू ने प्यार से कहा कि जाओ बाबा अब क्यों खड़े हो? अब दो घंटे की रेसिस हो गई है। पेट में चूहे कुश्ती कर रहे होंगे, जाओ पहले पेट पूजा करो। भक्तों की श्रद्धा देख बापू को भी कहना पड़ा-ये कैसा जादू है, हमको भी समझ में न आया।

सांसद यशोधरा राजे को दिया आशीर्वाद
संत आसाराम बापू के प्रवचन सुनने के लिए मेला ग्राउण्ड में पहुंची क्षेत्रीय सांसद श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ने जब बापू के चरणों में पुष्प हार अर्पित किया तो बापू उन्हें आशीर्वाद देते हुए उसी हार को उनके सिर से लपेट दिया। बापू के अप्रत्याशित प्रेम को देखकर श्रीमती सिंधिया अभिभूत हो गई ।

पांच हजार भक्तों ने ली दीक्षा
बुधवार को लगभग पांच हजार भक्तों ने दीक्षा ग्रहण की। तड़के से ही प्रवचन स्थल पर भक्तों का तांता लग गया। बापू की उपस्थिति में भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ गुरु दीक्षा ली।

भक्तों ने दी बापू को भावभीनी विदाई
संत आसाराम बापू के दो दिवसीय प्रवचन सम्मेलन के अंतिम दिन भक्तों ने अपने प्रिय संत के चरणों में गिरकर जमकर अश्रुपात किया। बापू के प्यार भरे सानिध्य ने भक्तों को प्रेम में ओतप्रोत कर दिया। सजल नेत्रों ने हिचकियां लेते हुए महिलाओं और बच्चों ने अपने संत को भावभीनी विदाई दी, साथ ही बापू से ग्वालियर शीघ्र आने का आश्वासन भी लिया।





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