राजस्थान के विभिन्न अंचलों से. आरक्षण की चिट्ठी लेकर ही घर जाने की बात कहकर जेल भर रहे गुर्जरों ने बुधवार को सरकार के वादे पर ही अपना आंदोलन
स्थगित कर दिया। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक एवं कोर कमेटी के अध्यक्ष कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला की ओर से मंगलवार को दिए गए छह सूत्री मांग पत्र को भी सरकार ने यह कहकर एक तरफ रख दिया कि पहले आंदोलन स्थगित करें, जिससे बातचीत का माहौल तैयार हो सके। बाद में इसी मांग पत्र पर एक कमेटी बनाकर बातचीत कर ली जाएगी। बातचीत कब होगी, यह अभी तय नहीं किया गया है। सरकार का कहना है कि गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति अपने प्रतिनिधियों की सूची सरकार को सौंपेगी, इसके बाद सरकार अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत करके समझौैता वार्ता का समय तय कर देगी।
कोर कमेटी के अध्यक्ष कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने बुधवार को अजमेर में पत्रकारों के सामने आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। उन्होंने 11 अक्टूबर से प्रस्तावित महिलाओं, बच्चों और पशुओं के जेल भरो आंदोलन को स्थगित करने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री विरोधी गुर्जर विधायक प्रहलाद गुंजल, अतरसिंह भड़ाना, राजेन्द्रसिंह विधूड़ी को अजमेर बुलाकर समझौता वार्ता में शामिल नहीं किए जाने के सवालों को बैसला टाल गए और कहा कि फैसला आम सहमति से ही होगा।
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव ने भेजी थी पाती : अजमेर जेल में कर्नल बैसला और अन्य गुर्जर नेताओं ने सरकार के प्रतिनिधि रामपाल जाट के जरिए सरकार को मंगलवार रात ही अपना मांग पत्र भिजवा दिया था। इस पर मुख्यमंत्री वसुंधराराजे, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष महेश शर्मा, महामंत्री रामपाल जाट, अनुशासन समिति के अध्यक्ष मदनलाल सैनी और प्रमुख सचिव सुनील अरोड़ा ने रात को ही रणनीति तैयार कर ली थी। इसके बावजूद बुधवार सवेरे फिर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुनील अरोड़ा की ओर से कर्नल बैसला को आग्रह पत्र भिजवाया।
सरकार की चिट्ठी का प्रारूप :
प्रिय कर्नल साहब,
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति द्वारा कोर ग्रुप की सहमति लेकर संभागीय आयुक्त अजमेर के माध्यम से राज्य सरकार को दिनांक 9 अक्टूबर, 2007 को प्रेषित मांग पत्र इस कार्यालय को प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार ने सदैव परस्पर संवाद के जरिये ही जनहित से जुड़े मामलों का समाधान निकालने में विश्वास रखा है। आप सहमत होंगे कि ऐसी कोई वार्ता तब तक सार्थक नहीं हो सकती, जब तक इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार नहीं किया जाए। तदनुसार निवेदन है कि औपचारिक वार्ता से पहले आपके नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को वापस लेने की घोषणा के साथ-साथ वार्ता में भाग लेने वाले प्रतिनिधिगण की सूची प्रेषित करने का कष्ट करें, जिससे कि इस विषय पर विचार किया जा सके।
-सुनील अरोड़ा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री
इसलिए नहीं हुआ बातचीत का समय तय:
अजमेर जेल में सरकार का प्रतिनिधि बनकर गए भाजपा महामंत्री रामपाल जाट कर्नल बैसला से आंदोलन स्थगित करने की घोषणा करवाकर तुरंत निकल गए, जबकि बैसला बातचीत का दिन और तारीख उसी समय तय कराना चाहते थे। बैसला ने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुनील अरोड़ा और प्रमुख गृह सचिव वी.एस. सिंह के पास इस बात की आपत्ति भी दर्ज कराई।
सूत्रों के अनुसार रामपाल जाट बातचीत का दिन और समय इसलिए तय नहीं करवा पाए, क्योंकि मुख्यमंत्री वसुंधराराजे सवेरे ही दिल्ली चली गई थी। दिनभर में कई बार प्रयास किए जाने के बाद भी उनसे संपर्क नहीं हो सका। जाट अपने स्तर पर यह फैसला लेने में सक्षम नहीं थे। इसलिए वे वहां से चुपचाप निकल लिए। जाट ने भास्कर को बताया कि बैसला की शिकायत सही है, लेकिन उनकी सूची मिलते ही वार्ता का समय तय करवा दिया जाएगा।
फैसले से कोई भी नाराज नहीं : बैसला
कर्नल बैसला ने कहा कि आंदोलन स्थगित करने और समाज से बातचीत जारी रखने का फैसला संघर्ष समिति और कोर कमेटी के सभी सदस्यों की सहमति से किया गया है। इससे किसी को नाराजगी नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश में स्वागत हो रहा है।
सरकार को क्या मिला
* सरकार और प्रशासन को मानसिक दवाब से मुक्ति।
* भय और अशांति का माहौल खत्म करने में मदद।
* नवंबर में हो रहे रीसर्जेट राजस्थान में अधिकाधिक पूंजी निवेश लाने में मदद।
* चोपड़ा कमेटी की रिपोर्ट आने तक का समय मिला।
* त्योहारी सीजन और पर्यटकों की संख्या फिर बढ़ सकेगी।
गुर्जरों को यह मिला
* आरक्षण की चिट्टी भिजवाने का मुद्दा जस का तस।
* गुर्जर नेताओं की किरकिरी होने से बची।
* जेलों में बंद गुर्जरों को फसल काटने और रबी की बुआई का समय मिला।
* गुर्जर नेता जेलों से निकलकर बना सकेंगे नई रणनीति।
चारों ओर विरोध
* अजमेर सेंट्रल जेल के बाहर बैसला के खिलाफ गुर्जरों का प्रदर्शन।
* जेल से निकलते ही लोगों ने सवाल किया- यही समझौता करना था तो इतना सब करने की जरूरत क्या थी।