जोधपुर. युवाओं में ह्रदय रोग बढ़ता जा रहा है। इसका मुख्य कारण तनावपूर्ण दिनचर्या व खानपान में परिवर्तन है। यह बात दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल
के कार्डियोलॉजिस्ट डा. रवि आर कासलीवाल ने बुधवार को यहां कार्डियोलॉजी पर आयोजित कार्यशाला में कही।
उन्होंने कहा कि जीवन शैली में परिवर्तन कर पैंतालीस प्रतिशत लोगों ने ह्रदय रोग से मुक्ति पाई है। यह आंकड़ा अमेरिका में युवाओं पर किए गए एक शोध में उजागर हुआ है। भारत के वर्किग एक ग्रुप के पैंतीस प्रतिशत लोग ह्रदय रोग से ग्रस्त हैं।
डा. रजनीश कपूर ने थ्रेबोलेटिक थैरेपी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एंजियोप्लास्टी से एक हजार में से 49 मरीजों को बचाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने लैटिक थैरेपी के बारे में कहा कि प्रारंभिक स्तर पर उपचार करने पर ह्रदय रोग की गंभीरता से बचा जा सकता है। डा. राहुल मल्होत्रा ने ह्रदय रोग के दौरान मेडिकल मैनेजमेंट के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार समय पर मेडिकल मैनेजमेंट कर रोग से समय पर मुक्ति पाई जा सकती है। कार्यशाला का संचालन डा. एसएन मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डा. संजीव सांघवी ने किया। इस अवसर डा. ओपी गर्ग भी मौजूद थे। डा. कासलीवाल एवं उनकी टीम ने लॉयंस क्लब वेस्ट के सहयोग से एक कैंप का आयोजन कर रोगियों की जांच की।
कैसे बचें ह्रदय रोग से
डा कासलीवाल ने ह्रदय रोग से बचाव के लिए जीवन शैली में परिवर्तन की आवश्यकता बताई। शराब व धूम्रपान से परहेज व नियमित व्यायाम करने से ह्रदय रोग की संभावना कम रहती है। ह्रदय रोग के लिए आयु कम महत्वपूर्ण कारक रह गई है अब जीवन शैली एक महत्वपूर्ण कारक बन गई है। इसके साथ ही हार्ट अटैक होने पर मरीज को तुरंत अस्पताल जाना चाहिए ना कि डाक्टर के घर जाकर उपचार पूछा जाए।
कौन है डाक्टर कासलीवाल
ह्रदय रोग विशेषज्ञ डाक्टर आरआर कासलीवाल इंद्रप्रस्थ अपोलो में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट हैं। तीस वर्षो से कार्डियोलॉजी क्षेत्र में देश के विख्यात मेडिकल संस्थानों में काम कर चुके हैं। डेढ़ सौ से अधिक साइंटिफिक पेपर देश विदेश की जरनल में प्रकाशित हो चुके हैं। कार्डियोलॉजी से संबंधित 25 किताबें अब तक प्रकाशित हो चुकी है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चार सौ से अधिक व्याख्यान दे चुके है।