भोपाल. वरिष्ठ भाजपा नेता सुंदरलाल पटवा और कैलाश जोशी के न्यौते पर बुधवार को नेता प्रतिपक्ष जमुनादेवी ने दोनों के घर जाकर उनसे अलग-अलग चर्चा की। श्री पटवा ने जमुनादेवी को अपने घर बुलाकर दाल-बाफले खिलाए और उनसे लोकायुक्त में की गई सीएम की शिकायत के बारे में चर्चा की। पूरे राजनीतिक जीवन में श्रीमती जमुनादेवी पहली दफा श्री पटवा के घर दाल-बाफले खाने पहुंची।
हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और अन्य कांग्रेस नेता तो अक्सर श्री पटवा के यहां भोज पर जाते रहते है। इसके बाद जमुनादेवी ने सांसद कैलाश जोशी के घर जाकर उनसे मंत्रणा की।
सूत्रों के मुताबिक श्री पटवा ने बुधवार सुबह फोन कर श्रीमती जमुनादेवी से बात की और उन्हें दाल-बाफले खाने घर आने का न्यौता दिया। जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। दोनों नेताओं के नजदीकी सूत्रों ने बताया कि पहले दोनों के बीच बाड़ी के बंद पंजीरी प्लांट के बारे में बात हुई।
श्री पटवा ने अपनी चिर-परिचित चुटीली शैली में कहा कि बंद प्लांट के सभी 45 बेरोजगार कर्मचारियों को आपके (जमुनादेवी) घर भेज दूं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भेज दे। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण आहार वितरण का ठेका निरस्त होने से अनभिज्ञता जाहिर की,लेकिन मंजूर किया कि घटिया पोषण आहार मिलने की उन्होंने शिकायत की है।
चर्चा के दौरान एक कंपनी विशेष का भी जिक्र आया तो नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उसका ठेका तो वर्ष 2007 तक का ही था। इसके बाद श्री पटवा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनकी पत्नी साधना सिंह के डंपर खरीदी के मुद्दे पर बात की।
उन्होंने कहा कि आपने (जमुनादेवी) लोकायुक्त में शिकायत की है। अगर यह शिकायत झूठी निकली तो आवेदक के खिलाफ कार्रवाई होती है। इस पर जमुनादेवी ने कहा कि उन्होंने विधि विशेषज्ञों से परामर्श कर शिकायत की है इस मुद्दे पर पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।
श्री पटवा के यहां दोपहर भोज कर जमुनादेवी श्री जोशी के घर पहुंची। उन्होंने दिल्ली से हाथ का आपरेशन कराकर लौटे श्री जोशी के हाल जाने और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। बातचीत के दौरान श्री जोशी ने भी उनसे लोकायुक्त में की गई शिकायत के बारे में चर्चा की।
प्रदेश के तीन वरिष्ठ नेताओं में बुधवार को हुई इस मुलाकात की राजधानी के राजनीतिक हल्कों में खासी चर्चा रही। ताजा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ नेताप्रतिपक्ष की लोकायुक्त में शिकायत के बाद वरिष्ठ नेताओं की अलग-अलग मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।