भोपाल. राज्य के ग्रामीण इलाकों को अब ऐसे प्राइवेट डाक्टरों के अनुभव का लाभ भी मिल सकेगा जो स्त्री अथवा शिशु रोग के विशेषज्ञ हैं। प्रदेश शासन एक योजना के तहत इन विशेषज्ञों के साथ सप्ताह में एक दिन ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देने का अनुबंध करेगा।
उन्हें एक हजार रु. प्रतिदिन का मानदेय तथा पांच रु. प्रति किमी की दर से यात्रा भत्ता दिया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई ने बुधवार को यहां मंत्रालय में आयोजित प्रेस कांफं्रेस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये विशेषज्ञ गांवों में पांच-छह घंटे की ओपीडी करेंगे।
इन्हें चिन्हित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नियत अंतराल से भेजा जाएगा। बीमारों का रजिस्ट्रेशन ग्रामीण अस्पताल करेंगे। उन्हें दवाईयां शासन द्वारा नि:शुल्क प्रदाय की जाएगी।
श्री विश्नोई ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग चिकित्सा शिक्षा विभाग से भी अनुरोध कर रहा है कि चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे तृतीय वर्ष के स्त्री रोग तथा शिशु रोग के छात्र-छात्राओं को माह में एक दिन ग्रामीण चिकित्सालयों में भेजा जाए।
ऐसे छात्र-छात्राओं को भी मानदेय की दर का निर्धारण अलग से किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि योजना के तहत ग्रामीण अस्पतालों में शासकीय पैरा मेडिकल स्टाफ सहयोगी के रूप में उपलब्ध रहेगा। विशेषज्ञ गांवों में ही रोगियों का परीक्षण कर सीधे उपचार करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें रैफर कर सकेंगे।
और क्या होगा (स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार)
-305 संविदा चिकित्सक नियमित
-900 और संविदा चिकित्सकों की भर्ती होगी
-स्कूली बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उनका रिकार्ड रखा जाएगा
-प्राथमिक स्वास्थ्यक केंद्र स्तर पर लेखापालों की नियुक्ति होगी।
-चयनित लेखापालों की नियुक्ति प्रक्रिया शीघ्र शुरू होगी।
जननी सुरक्षा के तहत
श्री विश्नोई ने बताया कि मेडिकल कालेजों के प्रसूति वार्ड एवं भोपाल, इंदौर, जबलपुर, रतलाम, ग्वालियर के जिला अस्पतालों में प्रसव के लिए भर्ती होने वाली महिलाओं को तीन चादर एवं एक तकिए का स्वच्छ सेट दिया जाएगा। ऑपरेशन वाली महिला हितग्राहियों को तीन दिन बाद पुन: एक सेट दिया जाएगा।