गुना.
देश के जिला अस्पतालों में जो सुविधाएं मुहैया नहीं हैं वे गुना जिले के दुर्गम जंगली इलाके में स्थित फतेहगढ़ के उपस्वास्थ्य केंद्र में गर्भवती महिलाओं को दी जा रही हैं। यहां बनाए गए देश के पहले वातानुकूलित (एसी) उपस्वास्थ्य केंद्र का औपचारिक उद्घाटन बुधवार को नार्वे की राजदूत एन. ओलेस्टेड ने किया।
जिला अस्पतालों में लोगों को कई सुविधाएं नहीं मिल पातीं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तो हालात इतने बदतर हैं कि डॉक्टर और दवाएं तक मरीजों को मुहैया नहीं होतीं, लेकिन गुना जिले का फतेहगढ़ उपस्वास्थ्य केंद्र अब देश में पहले पायदान पर आ गया है, जिसमें ग्रामीणों खासकर जच्च-बच्च को हर सुविधा दी जा रही है।
गुना जिले में खुला पहला एसी उपस्वास्थ्य केंद्र
यह सबसेंटर न सिर्फ वातानुकूलित है, बल्कि यहां पर डॉक्टर, नर्से, दवाइयां, आक्सीजन, कीटाणुमुक्त कक्ष, एंबुलेंस, इनवर्टर, जनरेटर, टीवी, डीवीडी प्लेयर सहित तमाम किस्म कि सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं। इस सबसेंटर को देखकर कहीं से भी यह सरकारी नहीं लगता। जिला प्रशासन ने सबसेंटर बनाया तो यूनीसेफ ने फुल टाइम डॉक्टर दे दिया।
फतेहगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर है। वहां की महिलाओं को प्रसव के लिए कच्चे रास्ते से होकर गुना आना पड़ता था। कुछ महिलाएं राजस्थान के छबड़ा, सिमरानिया और नाहरगढ़ जाकर प्रसव करातीं थीं, लेकिन अब स्थिति यह है कि राजस्थान की महिलाएं फतेहगढ़ आकर प्रसव करा रही हैं। इस उपस्वास्थ्य केंद्र में एक अप्रैल से 10 अक्टूबर तक 508 महिलाओं ने प्रसव कराया है।
बुधवार को औपचारिक उदघाटन के बाद नार्वे की राजदूत एन. ओलेस्टेड ने कहा कि यह नार्वे सरकार और उनका सौभाग्य है कि इतने अच्छे सेंटर का उद्घाटन उनसे कराया गया। उन्होंने कहा कि दुनिया के ज्यादातर देशों के लिए यह सेंटर एक अच्छा उदाहरण बन सकता है। उन्होंने कहा कि मैं भी एक बच्ची की मां हूं और प्रसव पीड़ा को जानती हूं। उन्होंने वादा किया कि वे फिर यहां आएंगी और यहां के विकास को देखेंगी।
यूनीसेफ के भारत प्रमुख डॉ. मार्जियों बेबलियो ने कहा कि आज परिवर्तन ने मूर्तरूप ले लिया है। उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव में महिलाओं के बराबर पुरुषों की भूमिका भी होनी चाहिए। कलेक्टर डॉ. जीके सारस्वत ने कहा कि फतेहगढ़ इलाका बारिश में पहुंचविहीन हो जाता है।
अब यह सबसेंटर बनने के बाद किसी प्रसूता की मौत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि इस सेंटर को ब्राडबैंड से भी जोड़ा जाएगा। इस मौके पर नार्वे एंबेसी के काउंसलर जेएच ओलसन, इंगर रेंडी ओलसन, एडवाइजर बीएन कुमार, रेन बड़ेरा, पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रसन्न होता, यूनीसेफ के प्रतिनिधि डॉ. गगन गुप्ता भी मौजूद थे।