News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. नए मास्टर प्लान में डूडा, डुमरतराई, सेजबहार और बोरियाखुर्द जैसे राजधानी के आउटर इलाके की जमीनें बड़े पैमाने पर आवासीय होंगी, ऐसी चर्चाएं हैं। प्रापर्टी डीलरों को इसकी उम्मीद थी, क्योंकि इन इलाकों में शहर के कई दिग्गजों के प्लाट हैं।
माना जा रहा है कि विकास की सारी योजनाएं इन्हीं इलाकों की तरफ शिफ्ट होने वाली हैं। इस वजह से इन इलाकों में ही जमीन के बिजनेस में गर्मी रहेगी। बाकी जगह प्रापर्टी का कारोबार मंदा पड़ सकता है।
मास्टर प्लान लीक तो नहीं हुआ है, लेकिन इसे लेकर बड़े वर्ग में चर्चाओं का दौर चल रहा है। इस कारोबार से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर इस कारोबार में जबर्दस्त मंदे के आसार जताए हैं।
उनका कहना है कि पिछले चार-पांच सालों में सिर्फ इनवेस्टमेंट और अल्टी-पल्टी (कारोबार की खास भाषा) से सौदागरों ने जमीन की कीमतों दो-तीन गुना तक बढ़ा दी थीं।
ऐसे इनवेस्टरों को तगड़ा झटका लग सकता है, क्योंकि नए मास्टर प्लान के बाद जमीन की कीमतें तीन साल पुराने स्तर पर भी पहुंच सकती हैं। इस झटके के बाद इनवेस्टमेंट बंद होगा। ऐसे में जमीन की कीमत आने वाले तीन-चार साल तक बढ़ना मुश्किल है।
कई इलाके उपेक्षित
कुछ बिल्डर्स ने बताया कि मास्टर प्लान में नई राजधानी से लगे इलाकों पर खास जोर दिया जा सकता है। देवपुर, डूडा, बोरियाखुर्द, बोरियाकला, सेजबहार, अमलीडीह जैसे इलाकों में आवासीय योजनाएं प्राथमिकता में रहेंगी।
सूत्रों के मुताबिक इसे ध्यान में रखते हुए कुछ दिग्गजों ने इन इलाकों में प्लाटिंग भी शुरू कर दी है। शासन की ताकत इन क्षेत्रों में लगेगी तो जाहिर है, बिलासपुर रोड, बलौदाबाजार रोड, कचना, रायपुरा, तेंदुआ जैसे इलाकों की भरपूर उपेक्षा होगी। फिलहाल इन क्षेत्रों में छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड और आरडीए की अरबों रुपए की योजनाएं प्रस्तावित हैं।
उल्लासनगर संभव
प्रापर्टी डीलरों की सोच है कि आउटर के इसी इलाके को थोक व्यापारी रायपुर का उल्लासनगर बनाने प्रयासरत हैं। उनके इस प्रयास में राजनीतिज्ञों का भी सहयोग है।
माना जा रहा है कि थोक बाजार में जिन व्यापारियों के पास जगह नहीं है, उनके लिए यह इलाका महत्वपूर्ण साबित होगा। यही वजह है कि इस इलाके में व्यापारियों ने बड़ी संख्या में प्लाट या तो खरीदे हैं या इसकी कोशिश में हैं।