News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. परीक्षा शुल्क में 130 रुपए इजाफा कर रविवि करीब पौने तीन करोड़ रुपए कमाएगा। छात्र इस वृद्घि के खिलाफ हैं और उन्होंने आंदोलन की तैयारी भी कर ली है। विडंबना यह है कि रविवि के बाद आटोनोमस कालेजों ने भी शुल्क बढ़ाने की तैयारी कर ली है।
रविवि में इस साल 1 लाख 30 हजार छात्र नियमित और 80 हजार प्राइवेट परीक्षा देंगे। 130 रुपए अतिरिक्त लेने से रविवि की कमाई में खासा इजाफा होगा। इसके अलावा विलंब शुल्क के नाम पर 100 से दस हजार रुपए प्रतिदिन के हिसाब से वूसली भी होगी।
छात्र और प्रोफेसर इस बात से हैरान हैं कि जो फीस कालेज वसूली करती हैं, उसी फीस को दुबारा विश्वविद्यालय क्यों वसूल रहा है। 130 रुपए का इजाफा लाइब्रेरी, खेल और अन्य सुविधाओं के लिए किया गया है। रविवि के बाद शहर के तीन प्रमुख आटोनामस साइंस कालेज, डिग्री गल्र्स और छत्तीसगढ़ कालेज में भी फीस बढ़ना लाजिमी है।
छत्तीसगढ़ कालेज में 25 रुपए वृद्घि का फैसला हो चुका है। यहां के लोगों का कहना है कि यह पहले से प्रस्तावित था क्योंकि यहां पेपर जांचने का शुल्क भी पांच से आठ रुपए कर दिया गया है। खर्च मेंटेन करने के लिए यह जरूरी था। साइंस कालेज में भी परीक्षा विभाग की बैठक गुरुवार को होगी। ऐसा माना जा रहा है कि परीक्षा फीस में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी तय है।
यही स्थिति डिग्री गल्र्स कालेज की है, वहां भी अगले एक-दो दिनों में परीक्षा फीस का निर्धारण हो जाएगा। परीक्षा विभाग के अधिकारी ने जानकारी दी कि फीस में बढ़ोत्तरी तो तय है लेकिन 10 प्रतिशत से अधिक फीस में वृद्धि नहीं की जाएगी।
जनभागीदारी के नाम पर भी लूट
रविवि के अंतर्गत सभी कालेजों से जनभागीदारी के नाम पर भी 100-200 रुपए वसूले जाते हैं। यह फीस भी एडमिशन के समय ही ले ली जाती है, लेकिन तीन से पांच साल बाद भी छात्र को इस राशि के उपयोग की जानकारी नहीं मिल पाती।
यह देखा गया है कि जनभागीदारी के नाम पर हर कालेज में लाखों रुपए एकत्र होते हैं, जो कालेज में ही छात्रों की सुविधाओं पर खर्च होने चाहिए। यहां छात्रों को पता ही नहीं है कि उनके लिए इस राशि से किस तरह की सुविधाएं मुहैया कराई गई है।
जनभागीदारी अब तक क्यों
अविभाजित मप्र में उच्च शिक्षा की स्थिति आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थी। तब शिक्षा को एक मुकाम पर पहुंचाने के लिए तात्कालिन सरकार ने आम लोगों को शिक्षा से जोड़ने के लिए ‘जनभागीदारी’ समिति का गठन किया था।
इसके अंतर्गत आम लोग कालेजों के उन्नयन और विकास के लिए स्वेच्छा से सहयोग करने लगे। समिति का एक चैयरमैन होता है, जो प्राप्त सहयोग को महाविद्यालय के विकास के लिए उपयोग करता था। शिक्षा के स्तर में विकास हुआ।
अब छात्रों से भी महाविद्यालय की सुविधाओं और विकास के लिए शुल्क लिया जाने लगा। यूजीसी ने भी शासकीय कालेजों को अनुदान देना शुरू कर दिया। उच्च शिक्षा विभाग भी सुदृढ़ हो गई। इसके बावजूद जनभागीदारी के नाम पर शुल्क लेना जारी है। इसके साथ-साथ अब छात्रों से परीक्षा शुल्क के नाम पर भी फीस ली जा रही है।
खेल के नाम पर लूट का ‘खेल’
कालेजों में खेल के नाम पर भी लूट का खेल शुरू हो गया है। खेल के नाम पर सभी कालेजों में छात्रों से 120 रुपए प्रवेश के समय ही ले लिए जाते हैं। अब परीक्षा फीस के साथ भी खेल के नाम पर 50 रुपए लिए जा रहे हैं।
छात्रों से लिए जाने वाले 120 रुपए में पहले ही 50 रुपए रविवि के खाते में जमा हो चुके हैं। बाकी 70 रुपए में कालेज खेल की गतिविधियां संचालित करता है। अब विश्वविद्यालय ने 50 रुपए यानि सालभर में 100 रुपए खेल के नाम पर लेने का निर्णय लिया है, जिसका जबर्दस्त विरोध किया जा रहा है।
दिसंबर नहीं, अक्टूबर लास्ट
विश्वविद्यालय ने परीक्षा फार्म भरने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर रखी है, जिसके लिए अब केवल 20 दिन रह गए हैं। विलंब शुल्क के साथ 15 दिसंबर फार्म भरे जा सकेंगे। पिछले वर्ष दिसंबर माह तक फार्म भरे गए थे, उसके बाद ही लेट फीस का सिलसिला शुरू हुआ। इस बार फीस में बढ़ोत्तरी के साथ अवधि में भी कटौती कर दी गई है।
प्राइवेट छात्रों से क्यों?
नियमित छात्रों के साथ-साथ प्राइवेट छात्रों से भी खेल, लाइब्रेरी, फर्नीचर, बिल्डिंग व कालेज वेलफेयर के नाम पर फीस वसूलने का भी कड़ा विरोध किया जा रहा है। इस बात का विश्वविद्याल के बड़े-बड़े अधिकारी भी जवाब नहीं दे पा रहे हैं कि प्राइवेट छात्रों से परीक्षा के साथ-साथ अन्य सुविधाओं की फीस क्यों ली जा रही है। प्राइवेट छात्र इस तरह का फायदा उठाते ही नहीं है। वे केवल एक बार परीक्षा देने ही कालेज आते हैं और परीक्षा फीस ही उनके लिए पर्याप्त है।
छात्र संगठन उग्र
एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष विकास उपाध्याय ने कहा कि शिक्षा प्रदान करने वाले विश्वविद्यालय को बिजनेस करने नहीं दिया जाएगा। जैसे-तैसे शहर-गांव के हजारों छात्र पढ़ाई कर अपना कैरियर बनाने में लगे हैं। इस तरह से मननाने ढंग से फीस बढ़ाकर विश्वविद्यालय छात्रों को आहत कर रहा है।
फीस में 130 रुपए की बढ़ोत्तरी के निर्णय को जब तक वापस नहीं लिया जाता, विश्वविद्यालय के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा। छात्र संघर्ष समिति के संरक्षक मृत्युंजय दुबे और जिला अध्यक्ष अश्वनी राजपूत ने कहा कि बढ़ी हुई फीस को वापस लिए जाने की मांग को लेकर गुरुवार को कुलसचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
फीस वापस नहीं ली गई, तो राज्यपाल से मुलाकात की जाएगी। अगर उचित निर्णय नहीं लिया गया तो छात्र सड़क पर उतरेंगे। साइंस कालेज के छात्रनेता शैलेंद्र तिवारी ने कहा कि हर साल फीस में बढोत्तरी होती है, लेकिन इस बार अगर 10-15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हुई तो इसका जबर्दस्त विरोध किया जाएगा।