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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
अकेले राजधानी रायपुर के 75 से ज्यादा स्कूलों में छात्र - छात्राओं की संख्या 100 से कम है। स्कूली शिक्षा विभाग ऐसे स्कूलों को आसपास के स्कूलों में मर्ज करने पर विचार कर रहा है। रायपुर शहर और ग्रामीण इलाके में 277 प्राइमरी स्कूल हैं। इनमें से 99 स्कूलों का संचालन नगर निगम कर रहा है। बाकी स्कूल स्कूली शिक्षा विभाग व नगरपालिकाओं के जिम्मे हैं।
सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी छात्रों की संख्या लगातार घट रही है। शहरी इलाकों में लोग निजी स्कूलों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसका प्रमुख कारण अंग्रेजी की शिक्षा बताई जा रही है। सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी की पढ़ाई अपनी छाप नहीं छोड़ पा रही है। यहां के बच्चे अंग्रेजी बोलना तो दूर पढ़ने से भी हिचकते हैं।
शासन के समक्ष एक संस्था द्वारा पेश सर्वे रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मसलन, शहर की करीब 100 सरकारी स्कूलों में से 75 में बच्चों की कुल संख्या 100 से भी कम है। बैजनाथपारा, बूढ़ापारा, छोटापारा, बैरनबाजार, अमीनपारा, नयापारा, कटोरातालाब, मौदहापारा जैसे इलाकों के प्राइमरी स्कूलों में तो पहली से पांचवी कक्षा तक कुल 50 बच्चे भी नहीं हैं।
स्कूली शिक्षा विभाग ने शिक्षा सत्र शुरु होने से पहले शिक्षकों को घर - घर भेजकर बच्चों के बारे में जानकारी भी जुटाई। प्रवेश उत्सव मनाया फिर भी परिणाम उत्साहवर्धक नहीं माना जा रहा है। निचली बस्तियों व ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या में ज्यादा कमी नहीं आई है।
इसका कारण है कि वहां निजी स्कूल नहीं हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक ऐसे स्कूलों की सूची तैयार की जा रही है जहां दर्ज संख्या बेहद कम हैं। शहर के ऐसे स्कूलों को करीब के स्कूलों में ही मर्ज करने की योजना अगले शिक्षा सत्र में ही लागू हो सकती है।
>> स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं। शासन ने शरतचंद्र बेहार को सलाहकार नियुक्त किया। वे सभी पहलुओं पर विचार कर सलाह देंगे।
अजय चंद्राकर, स्कूली शिक्षा मंत्री
कुछ स्कूल ऐसे भी
शहर में कुछ स्कूल ऐसे हैं जहां क्षमता से ज्यादा बच्चे हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि तेलीबांधा के तीनों सरकारी स्कूलों में बच्चे ज्यादा होने के कारण कुछ कक्षाएं मैदान में लगाई जा रही है। कमरे कम पड़ गए हैं और प्रधानपाठक मैदान में ही बैठ रहे हैं।
शहरों में शिक्षक ज्यादा :
स्कूली शिक्षा विभाग ने 40 छात्र
छात्राओं के पीछे एक शिक्षक नियुक्त करने का नियम बना रखा है। लेकिन यहां हालात ये है कि जहां कुल मिलाकर 40 बच्चे नहीं हैं वहां भी 7 -8 शिक्षक हैं। वहीं गांवों के स्कूलों में शिक्षकों की लगातार कमी बनी हुई है। संिवदा व शिक्षाकर्मियों के जरिए इस कमी को दूर करने की कोशिश जरूर की जा रही है।