इंदौर. इंदौर प्रीमियर को-ऑपरेटिव बैंक के संचालक मंडल में बहुमत के बाद अब भाजपा में अध्यक्ष पद को लेकर घमासान मचा है। चौंकाने वाले घटनाक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता विष्णुप्रसाद शुक्ला ने खुद को अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग कर लिया है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अध्यक्ष पद के लिए तीन संचालकों का दावा सामने आया है जिनमें अध्यक्ष उमानारायण पटेल के साथ ही भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष कैलाश पाटीदार व पूर्व नगर अध्यक्ष रमेश मेंदोला शामिल हैं।
बताया जाता है कि संचालकों के एक बड़े वर्ग (11 में से आठ) की कवायद श्री पटेल को अध्यक्ष पद पर काबिज होने से रोकने की है और इस काम में पार्टी के अनेक नेता उनकी खुलकर मदद कर रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि श्री पटेल सालभर से बैंक के अध्यक्ष रहते हुए अपनी जमीन तैयार नहीं कर पाए।
इसी के चलते चुनाव के पहले ऐनवक्त पर उन्हें ग्रामीण क्षेत्र के बजाय शहरी समूह से चुनाव लड़ना पड़ा। यहां भी उनकी हार को टालने के लिए पार्टी ने ऐनवक्त पर उम्मीदवार बदले। श्री पटेल के समर्थक भले ही सांसद सुमित्रा महाजन का समर्थन होने की बात कह रहे हैं लेकिन श्रीमती महाजन ने इस मामले में अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।
इधर, श्री पटेल को अध्यक्ष पद से दूर रखने के लिए ही कैलाश पाटीदार, रमेश मेंदोला व विष्णुप्रसाद शुक्ला में अघोषित गठजोड़ हो गया है। तय रणनीति के मुताबिक इन्होंने अध्यक्ष पद के लिए श्री पाटीदार के नाम को सबसे ऊपर रखा है।
इसके पीछे उनका तर्क यह है कि श्री पाटीदार ग्रामीण क्षेत्र के निर्विवाद व सर्वमान्य नेता हैं। उनके नाम पर सांसद, विधायक व पार्टी पदाधिकारी किसी को आपत्ति नहीं होगी, संगठन में विभिन्न पदों पर रह चुके हैं और सहकारी राजनीति का उन्हें अच्छा-खासा अनुभव है।
भले ही श्री शुक्ला ने यह कहकर कि किसी नए चेहरे को अध्यक्ष पद का दायित्व सौंपा जाए, खुद को अध्यक्ष पद की दौड़ से अलग जरूर कर लिया है लेकिन पार्टी के एक वर्ग ने उनका नाम अपेक्स बैंक के प्रतिनिधि के लिए आगे बढ़ाया है। लोक निर्माण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस चुनाव को लेकर अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। बताया जा रहा है कि वे संभवत: प्रदेश नेतृत्व का रुख भांपने के बाद ही चुप्पी तोड़ेंगे।