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Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. सिटीजन आफ बिलासपुर की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 25 नवंबर को दिए गए निर्देशों के बाद अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी। नगर निगम, पुलिस, नेशनल हाईवे व परिवहन विभाग के अफसरों ने कोर्ट में जवाब प्रस्तुत किया।
शहर में सड़क, पानी, यातायात, साफ-सफाई की दुर्दशा को लेकर हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर बुधवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस जेसी भल्ला व जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की डिवीजन बेंच में अंतिम सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने पूर्व में की गई सुनवाई में दिए गए निर्देर्शो के बाद नेशनल हाईवे व पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण यंत्री से पूछा कि फोरलेन के निर्माण में क्या प्रगति है।
उन्होंने अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए कोर्ट को बताया कि भविष्य में बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे-200 की स्थिति अच्छी रहेगी और उसके रखरखाव पर लोक निर्माण विभाग ध्यान देगा।
इसके अलावा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी की ओर से परिवहन आयुक्त ने कहा कि राज्य में विभाग द्वारा भारी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अभियान चलाया जाएगा और हाईवे पर गलत तरीके से पार्क किए गए वाहनों पर भी नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी ने भी इस संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी दी। बिगड़ती यातायात व्यवस्था के संबंध में उप पुलिस अधीक्षक यातायात सुशील डेविड ने हाईकोर्ट को बताया कि पुलिस अधीक्षक द्वारा हाल ही में 64 पुलिस अधिकारी व कर्मचारी यातायात पुलिस थाने को उपलब्ध कराए गए हैं, जो जल्द ही शहर के विभिन्न स्थानों पर पदस्थ किए जाएंगे ताकि यातायात व्यवस्था सुधारी जा सके।
श्री डेविड ने कहा कि भविष्य में शहर के यातायात को लेकर कोई समस्या न आए, इस दिशा में प्रयास किए जाएंगे। शासन की ओर से मामले की पैरवी उप महाधिवक्ता श्री मूर्ति ने की। हाईकोर्ट ने न्यायमित्र प्रीतिंकर दिवाकर व राजीव श्रीवास्तव के प्रयासों की सराहना की। इस तरह यह जनहित याचिका निराकृत कर दी गई।
मामा-भांजा तालाब में नहीं जाएगा गंदी पानी
हाईकोर्ट ने नगर निगम से मामा-भांजा तालाब की स्थिति की जानकारी मांगी। इस पर निगम के स्टेंडिंग काउंसिल आशुतोष कछवाहा ने कोर्ट को अवगत कराया कि हाल ही में निगम ने टिकरापारा रोड व रेलवे कालोनी की ओर से आने वाले प्रदूषित जल का मार्ग परिवर्तित कर मन्नू चौक की ओर बनी मुख्य नाली में जोड़ा है।
वार्ड-31 के प्रदूषित पानी के निकासी के लिए डेढ़ माह के भीतर नाली का निर्माण कर दिया जाएगा। इसके निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की जा चुकी है। नाली बन जाने के बाद किसी भी तरफ से गंदा पानी तालाब में नहीं जाएगा। इधर मामा-भांजा तालाब की मालकिन श्रीमती गोदावरी शेष की ओर से अधिवक्ता प्रमोद वर्मा ने कोर्ट से कहा कि यह तालाब निजी स्वामित्व का है।