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लास्ट वर्किग डे पर डीएसपी ठाकुर को सेंसर

चंडीगढ़चंडीगढ़ प्रशासन ने डीएसपी देवेन्द्र ठाकुर को नौकरी के लास्ट वर्किग डे पर दोषी करार देते हुए सजा के तौर पर सेंसर (छोटी सजा) दिया है। ठाकुर 30 सितंबर को रिटायर हुए थे और 28 सितंबर को प्रशासन ने उनके खिलाफ यह आदेश जारी किया। 30 सितंबर को रविवार और 29 को शनिवार होने के कारण 28 सितंबर (शुक्रवार) ठाकुर का लास्ट वर्किग डे था। इससे पहले 12 सितंबर को चंडीगढ़ प्रशासन के दबाव में आईजी ने ठाकुर को पब्लिक डीलिंग पोस्ट (एसडीपीओ-ईस्ट) से हटाकर डीएसपी-पुलिस लाइन के रूप में तैनात कर दिया था।

डीएसपी ने कबूल की गलतीडीएसपी ठाकुर ने 14 सितंबर 2007 को चंडीगढ़ प्रशासन को पत्र लिख अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने मान लिया कि कोसेट्स कंपनी में अपनी बेटी की नौकरी की बात सीनियर अफसरों से छुपा कर विभाग को धोखा दिया था। गलती स्वीकारने के साथ ही ठाकुर ने प्रशासन से इसके लिए क्षमा याचना की थी। पत्र में उन्होंने कहा था कि भविष्य में कभी ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।

प्रशासन का फैसला :

चंडीगढ़ प्रशासक के तत्कालीन सलाहकार ललित शर्मा ने ठाकुर के दोष स्वीकारने के बाद 28 सितंबर (ठाकुर के नौकरी के आखिरी वर्किग डे पर) को उन्हें इस गलती के लिए सेंसर देकर पिछले 4 साल से जारी उठा-पटक पर विराम लगा दिया। ललित शर्मा की नौकरी का भी यह लास्ट वर्किग डे था।

केस हिस्ट्री :

आम जनता के करोड़ों रुपए हड़प कर फरार होने वाली कोसेट्स कंपनी के खिलाफ सेक्टर-26 थाने में 27 नवंबर 2002 को केस दर्ज हुआ था। वर्ष 2003 में डीएसपी देवेन्द्र ठाकुर ने इस केस की जांच की थी। ठाकुर की बेटी इस कंपनी में नौकरी करती थी और उनके परिवार के कई सदस्य कंपनी के सदस्य थे। इस बात की जानकारी ठाकुर ने अपने सीनियर अफसरों से छुपाई और जांच के दौरान कंपनी को परोक्ष रूप से लाभ पहुंचाया। इस बात का खुलासा होने के बाद वर्ष 2005 में प्रशासन ने सीवीसी के आदेश पर ठाकुर को पब्लिक डीलिंग पोस्ट से हटाया और सीबीआई से ठाकुर पर आरोपों की जांच करवाई। सीबीआई जांच में भी ठाकुर दोषी करार दिए गए। प्रशासन ने ठाकुर के खिलाफ एक्शन लेने से पूर्व उनसे स्पष्टीकरण मांगा। पहले तो ठाकुर अपने आप को निर्दोष करार देते रहे, पर रिटायरमेंट से 16 दिन पहले उन्होंने दोष कबूल लिया।





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