नई दिल्ली. विशेष आर्थिक जोन या सेज समेत औद्योगिक परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत की जाने वाली भूमि के मामले में केबिनेट ने पुनर्वास नीति को मंजूरी दे दी है।
केंद्र ने गुरुवार को भूमि अधिग्रहण के मामले में राष्ट्रीय नीति को मंजूरी देते हुए जमीन के बदले जमीन मुहैया कराने की हिमायत कर दी है। इसके अलावा इस नीति के मुताबिक जिनकी जमीन पर परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी उन परिवारों को नौकरियों में भी प्राथमिकता दी जाएगी।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय केबिनेट की बैठक में स्पष्ट किया गया कि पुनर्वास और पुनस्र्थापन की राष्ट्रीय नीति 2007, इसी तरह की 2003 की नीति का स्थान लेगी। बैठक के बाद सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रियरंजन दासमुंशी ने मीडिया से कहा कि पूर्ववर्ती एनडीए सरकार की नीति किसानों के हित में नहीं थी और इसी की वजह से कई तरह की दुखद घटनाएं झेलना पड़ीं।
दासमुंशी ने कहा कि इस नई नीति को अमल में लाने के लिए भूमि अधिग्रहण एक्ट 1894 में संशोधन करने के लिए सरकार विधिसम्मत कार्रवाई करेगी। दासमुंशी ने बताया कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास मामले को संचालित करने के लिए एक राष्ट्रीय पुनर्वास आयोग बनाया जाएगा।
नीति से होने वाले फायदे :
>> सरकार के पास उपलब्ध दूसरे इलाके में जमीन का आवंटन।
>> औद्योगिक परियोजना से प्रभावित परिवार के कम से कम एक व्यक्ति को नौकरी में प्राथमिकता।
>> पुनर्वास पैकेज में एससी और एसटी के लिए विशेष प्रावधान।
सोनिया का गुणगान :
नई नीति के लिए सारा श्रेय यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी को देते हुए दासमुंशी ने कहा कि उन्होंने ही कांग्रेस के भीतर और जनता के बीच इस मुद्दे को जोरदार ढंग से रखा। साथ ही उन्होंने देहरादून में कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भी यह मामला प्रमुखता से रखा था। दासमुंशी ने कहा कि इसके बाद ही मंत्रियों के एक समूह का गठन सरकार ने किया था जिसने एक नई नीति के बारे में विचार किया।
क्यों पड़ी जरूरत :
देश भर में विशेष आर्थिक जोन या सेज बड़ी संख्या मंे स्थापित किए जाने के भारी विरोध से राज्यों समेत केंद्र सरकार भी दबाव में आ गई थी। औद्योगिक परियोजनाओं के लिए गांवों में या कृषि भूमि के अधिग्रहण का भी कई जगह विरोध हुआ था खासकर लेफ्ट के शासनाधीन पश्चिम बंगाल के सिंगूर में। किसानों के हित में एक नीति के लिए सरकार पर जो दबाव था उसी के नतीजे के तौर पर यह नई राष्ट्रीय पुनर्वास नीति बनाई गई है।