नई दिल्ली. राजधानी की सड़कों से 15 नवंबर तक ब्लू लाइन बसों को चरणबद्ध तरीके से हटा लिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने इस संबंध में गुरुवार को दिल्ली
हाईकोर्ट को भी अवगत करा दिया है। सरकार ने कोर्ट को इसकी योजना पेश करने की तैयारी भी दिखाई। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी घातक दुर्घटना में लिप्त बस को हाईकोर्ट की अनुमति के बिना लौटाया नहीं जाएगा। हाईकोर्ट ने कहा कि अब बस वापस लेने के लिए मालिक को भारी-भरकम जुर्माना देना होगा।
सरकार की वकील मुक्ता गुप्ता ने जस्टिस मुकुल मुद्गल और जस्टिस रेवा खेत्रपाल की बेंच के सामने स्वीकारा कि शहर की सड़कों पर 1 जनवरी से 9 अक्टूबर के बीच 826 ऐसी बसें चलती रहीं, जिनके गति निर्धारण करने वाले उपकरण के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
इस दौरान तेज गति के कारण नौ बसों का चालान किया गया और शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में 25 ड्राइवरों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आखिर आपने किस तरह के प्रमाणपत्र दे रखे थे?
सोनिया से मिलीं शीला दीक्षित
रविवार को ब्ल्यू लाइन बस से आठ लोगों के कुचलकर मरने और नौ अन्य के घायल होने की घटना से क्षुब्ध कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गुरुवार को सफाई दी। मुख्यमंत्री ने मुलाकात के बाद हालांकि इसे औपचारिक भेंट बताया लेकिन दिल्ली सरकार जिस तरह से मामले में सक्रिय हुई है, उसे देखते हुए जाहिर है कि आलाकमान मामले को लेकर काफी चिंतित हैं।