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कढ़ी का शौक था किशोर को

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खंडवा.अशोक कुमार, अनूप कुमार और किशोर कुमार कढ़ी के शौकीन थे। मुंबई में अच्छा छांछ नहीं मिलने के कारण वे जब भी खंडवा आते और जान-पहचान वालों के यहां भोजन करने जाते तो सबसे पहले कढ़ी ही मांगते थे। वह भी कटोरी या प्लेट में नहीं बल्कि बड़ी किनार वाली थाली में।

जलेबी की याद आई
1. खंडवा में किशोर दा के अंतिम प्रोग्राम के लिए उन्हें इंदौर लेने के लिए अधिवक्ता गोविंद झंवर गए थे। किशोर के साथ लीना चंदावरकर, अमित कुमार और अनूप कुमार भी थे। सनावद आते ही किशोर को जलेबी की याद आई और उन्होंने जिद की। जब समझाया गया कि आपके यहां उतरने से भीड़ इकट्ठा हो जाएगी तो भी वे नहीं माने और अड़े रहे। अंतत: वे जलेबी खाकर ही सनावद से आगे बढ़े।

कामयाबी पा ली
1953 में फिल्म फरेब की रिकॉर्डिग थी। किशोरदा को गाना था- हुस्न भी है उदास-उदास..। इस गीत में उदास-उदास के बाद थोड़ी-सी मुरकी थी, जो लाख कोशिश के बाद भी वे नहीं गा पा रहे थे। संगीतकार अनिल बिस्वास ने उन्हें घर चले जाने के लिए कह दिया। दु:खी होने के बाद भी आत्मविश्वास के साथ उन्होंने उस गाने की रिहर्सल इतनी बार की कि उसमें उस प्रभाव को पैदा करने में कामयाबी पा ली, जो संगीतकार को चाहिए था।

पंचमदा ने राजी किया
1979 में आराधना के समय सचिनदा और शक्ति सामंत की राय थी कि सारे गाने रफी से गवाए जाना चाहिएं लेकिन पंचमदा ने अपनी दलीलों के जरिये उन्हें राजी कर लिया कि किशोरदा से भी गाना गवाया जाए। उसके बाद जो हुआ, वह इतिहास है।

कर्कश थी आवाज
बचपन में किशोर की आवाज बहुत कर्कश थी। जुबान भी बहुत साफ नहीं थी। अकसर खांसी हो जाती थी। फिर भी उन्हें गाने का बहुत शौक था। उन्होंने पांच साल की उम्र से गाने की शुरुआत कर दी थी। वह गाना कम, चिल्लाना ज्यादा होता था।

रोने से आवाज ठीक हुई
अशोक कुमार ने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा ले रखी थी और नियमित गाया करते थे। उन्होंने किशोर को एक छोटा सा हार्माेनियम ला दिया। वे उसे छत पर ले जाते और अकेले ही गाते। उन्हें अकेलापन पसंद था। वे कई लोगों की नकल भी किया करते थे। बताते हैं एक बार किशोरदा को पैर में चोट लग गई। वे दर्द के मारे रोते रहे और उनकी कर्कश आवाज ठीक हो गई।

नितिन मुकेश के सामने डांस
फिल्म क्रांति का ‘चना जोर गरम’ गाना बहुत कठिन था। किशोरदा, रफी और लता मंगेशकर ने यह गाना गाया। कुछ अंश नितिन मुकेश को भी गाना थे। तीनों महान गायक तो अपनी लाइनें अच्छे से गा लेते थे लेकिन नितिन मुकेश की बारी आते ही किशोरदा उनके सामने जाकर डांस करने लगते थे। संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल नितिन मुकेश को हर बार डांटते थे। किशोरदा की हरकत लताजी ने संगीतकार प्यारेलालजी को बताई और तब जाकर मामला सुलझा। उन्होंने ब्राजीली गायकों की नकल कर युडलिंग सीखी थी।



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