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गुर्जर मृतक आश्रितों को नौकरी मिलेगी

अजमेर/जयपुर. जनजाति में आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे गुर्जरों की मृतकों के आश्रितों को नौकरी और घायलों को मुआवजा देने की मांग सरकार ने सिद्धांतत: मान ली है। इसके साथ ही पिछले साल 3 सितंबर को हिंडौन में रेल पटरियां उखाड़ने पर दर्ज हुए मुकदमों को वापस लेने पर भी सहमति हो गई है। अजमेर जेल में बैसला समर्थक गुर्जर नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे हुई वार्ता में यह समझौता हुआ। इस समझौते पर अभी मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की मुहर लगना बाकी है। इस वार्ता में गुंजल-भड़ाना समर्थकों को शामिल नहीं किया गया।

भाजपा महामंत्री रामपाल जाट के अनुसार गुर्जरों को जनजाति में आरक्षण की सिफारिशी चिट्ठी भेजने की तारीख तय नहीं हो पाई। गुर्जरों को भरोसा दिलाया है कि चोपड़ा कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद विधि अनुसार इसे केन्द्र को भिजवा दिया जाएगा। सरकार ने गुर्जरों की इस बात को भी मान लिया है कि कमेटी को जल्दी काम पूरा करने के लिए जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

बातचीत जारी रहेगी:
रामपाल जाट के अनुसार कोर कमेटी के लोगों से बातचीत अभी जारी रहेगी। जिन मांगों पर सहमति बनी है, उससे मुख्यमंत्री वसुंधराराजे को अवगत कराया जाएगा। अगली बातचीत का दिन और समय एक-दो दिन में तय कर लिया जाएगा।

29 मई के बाद के मुकदमों की कानूनी समीक्षा होगी :
सरकार ने 29 मई से दो अक्टूबर 2007 के जेल भरो आंदोलन के दौरान गुर्जरों के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लेने से मना कर दिया है, लेकिन यह भरोसा दिलाया है कि इन मुकदमों की न्यायिक जांच के परिप्रेक्ष्य में समीक्षा की जाएगी। उसके बाद ही मुकदमे वापस लेने या नहीं लेने के बारे में फैसला होगा। समीक्षा की अवधि अभी तय नहीं की गई है।

गुर्जरों से शांति की अपील:
सरकार ने गुर्जर-मीणा समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की है। अपील में कहा गया है कि वे भाईचारा बनाए रखें। जातीय विद्वेष को फैलने से रोकें जिससे राजस्थान को विकास के रास्ते पर आगे ले जाया जा सके।

इन्होंने किया फैसला:
सरकारी पक्ष : सांसद रामदास अग्रवाल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह, जल संसाधन मंत्री प्रो. सांवरलाल जाट।
कोर कमेटी : कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला, कैप्टन हरप्रसाद, कैप्टन जगराम, पूर्वमंत्री संपतसिंह सहित करीब 27 लोग।

जेल में ही रहेंगे बैसला:
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति और कोर कमेटी के अध्यक्ष कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला ने समझौते पर मुख्यमंत्री की मुहर लगने तक जेल में ही रहने का फैसला किया है।

यह था कोर कमेटी का मांग पत्र:
* गुर्जर समुदाय को जनजाति का दर्जा देने का सिफारिशी पत्र चौपड़ा कमेटी से रिपोर्ट लेकर विधि अनुसार केन्द्र को भेजा जाए।
* गुर्जरों के 29 मई के आंदोलन से लेकर आज तक के मुकदमे वापस लिए जाएं। 2 अक्टूबर से पहले और बाद में गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए।
* हिंडौन में 3 सितंबर, 2006 को रेल रोको आंदोलन के दौरान दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
* आंदोलन के दौरान हुए शहीदों के आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।
* 29 मई से 4 जून के दौरान घायल हुए आंदोलनकारियों को मुआवजा राशि दी जाए।
* लालसोट में गुर्जरों की एक समुदाय विशेष के लोगों द्वारा की गई हत्या के नामजद मुल्जिमों को गिरफ्तार किया जाए। जिन लोगों के इशारे पर यह घटना हुई, उन्हें मुल्जिम बनाकर गिरफ्तार किया जाए।

न्यायिक जांच आयोग का दायरा तय होगा:
सांसद रामदास अग्रवाल ने वार्ता के बाद पत्रकारों को बताया कि कोर कमेटी की ज्यादातर मांगों पर सहमति बन चुकी है। न्यायिक जांच आयोग का दायरा किस प्रकार का हो, इसका हल मुख्यमंत्री और गृहमंत्री से चर्चा के बाद निकाला जाएगा। घायलों को मिलने वाली मुआवजे की राशि भी मुख्यमंत्री से बातचीत करके तय की जाएगी।

मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी:
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. दिगंबरसिंह ने बताया कि सभी मृतक आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया जल्द शुरू हो जाएगी। बाकी मांगों पर भी मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद अमल शुरू कर दिया जाएगा।





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