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जनजाति की कसौटी पर गुर्जर : अटल

उदयपुर. गुर्जर जाति को जनजाति की कसौटी पर कसने का काम चल रहा है। गुर्जरों ने हजारों की संख्या में शपथ पत्र व प्रतिवेदन दिए हैं। वस्तुपरक अध्ययन के बाद किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा।

चोपड़ा कमेटी के सदस्य योगेश अटल ने शनिवार को सर्किट हाउस में भास्कर संवाददाता से यह बात कही। उन्होंने बताया कि गुर्जरों का मसला जाति विशेष का नहीं है। इसके प्रभाव-दुष्प्रभाव दोनों संभावित है। इसलिए हर पहलू के मद्देनजर विश्लेषण और वस्तुपरक जांच की जा रही है। राज्य के बीस जिले गुर्जर बहुल क्षेत्र के रूप में चिन्हित किए गए हैं। सरकार के पास जाति विशेष के लोगों की संख्या का डाटा नहीं है। इसके अलावा गुर्जर अलग-अलग उपनाम व गौत्र से जाने जाते हैं। इसलिए समिति सदस्य गांव-गांव जाकर गुर्जर जाति के जनजाति होने के दावे का अध्ययन कर रहे हैं। गुर्जर बहुल 7 सौ गांवों में से 107 गांवों में यह कार्य पूरा हो चुका है। 300 गांवों में कार्य जारी है। गुर्जर नेताओं को भी सुना जा रहा है।

श्री अटल ने बताया कि कार्यक्षेत्र लंबा-चौड़ा हो गया है। इसलिए रिपोर्ट तैयार होने में समय लग सकता है। गुर्जर अभी जनजाति की कसौटी पर हैं। रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि गुर्जर कसौटी पर खरे हैं या नहीं।

आरक्षण मसला नहीं
योगेश अटल ने कहा कि आरक्षण मसला नहीं है। गुर्जर पहले से अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं और आरक्षण का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गुर्जरों की वास्तविक मांग जनजाति वर्ग में शामिल होना है। गलत प्रचार-प्रसार के कारण आम जन-जीवन प्रभावित होता है।

रीति-रिवाज भी बनेंगे कसौटी
जांच में रीति-रिवाज और ज्यौहारों को भी शामिल किया गया है। जनजाति में गवरी, मौताणा आदि प्रचलित है। इसी तरह शिक्षा, आर्थिक, सामाजिक स्तर को परखा जा रहा है।





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