भागदौड़ की जिंदगी से उबरकर अगर आप सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं तो कर्नाटक के हिल स्टेशन कुर्ग पहुंच जाएं। यहां आप कुदरत की खूबसूरती का लुत्फ उठा
सकते हैं।
कहां है:
बेंगलूर से 252 किमी. दूर और समुद्र तल से 1525 किमी. की ऊंचाई पर बसा है कोडागू जिला जिसे आज कुर्ग कहा जाता है। वैसे इसका ओरिजनल नाम कोडाईमलेनाडू है। खूबसूरत पहाड़ियां, घने जंगल, कई एकड़ क्षेत्र में फैले चाय और कॉफी के बागान इस हॉलीडे डेस्टिनेशन को औरों से अलग बनाते हैं। यहां आकर आप टीवी, न्यूजपेपर, इंटरनेट की दुनिया से दूर चले जाएंगे। कुर्ग की खासियत व्हाइट पैपर, इलायची और कॉफी है, जिसे आप खरीदकर भी ले जा सकते हैं।
दर्शनीय स्थल
* माधीकेरी फोर्ट : माधीकेरी के बीचों-बीच बना मंदिर, चर्च, जेल और छोटा सा म्यूजियम आपको काफी हद तक यहां के इतिहास की जानकारी देता है। फोर्ट से देखने पर आपको हरी-भरी वादियां ही नजर आती हैं।
* राजा की सीट : पुरानी बातों पर यकीन करें तो कोडागू के राजा इस जगह अपनी शामें गुजारा करते थे। लेकिन यहां से न भूलने वाली चीज सूर्यास्त का विहंगम दृश्य है जिसका आप भरपूर लुत्फ उठा सकते हैं।
* नेशनल पार्क : कुर्ग की सबसे ज्यादा घूमी जाने वाली जगह नागराहोल नेशनल पार्क ही है। यहां हाथी, टायगर, लेपर्ड, सांबर, स्पॉटेड हिरन और बायसन की प्रजातियां पाई जाती हैं। यहां रात में रुकने की सहूलियत भी है। इसके अलावा तला कावेरी यानी कावेरी नदी का उद्गम स्थल भी देखने लायक जगह है।
* शिवलिंग : यहां का शिव मंदिर, गणोश मंदिर और अश्वंथा का पेड़ भी काफी मशहूर है। अश्वंथा के बारे में मान्यता है कि त्रिमूर्ति यानी ब्रrा, विष्णु और महेश एक साथ यहां अगस्त्य ऋषि के दर्शन करने आए थे।
* इरिप्पू और अब्बी वॉटर फॉल : ब्रहमा गिरी की पहाड़ियों और लक्ष्मण-तीर्थ नदी पर बने इरिप्पू वॉटर फॉल के बारे में कहा जाता है कि सीता को ढूंढ़ते हुए भगवान राम यहां से गुजरे और पानी पीना चाहा, इसके लिए लक्ष्मण ने तीर चलाकर नदी का रुख इस तरफ मोड़ा और यहीं से धारा बह निकली। माधीकेरी से 8 किमी. दूर एक बड़ा टूरिस्ट स्थल अब्बी वॉटर फॉल भी है।