भोपाल. प्रदेश के शिक्षकों के लिए यह दीवाली का तोहफा है, अब उन्हें पेंशन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। रिटायरमेंट के दिन ही उन्हें पेंशन आदि देय सभी देय राशियों का भुगतान होगा। अगर बकाया राशि का भुगतान सेवानिवृत्ति तिथि पर नहीं किया जाता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी आहरण संवितरण अधिकारी और स्वीकृतकर्ता अधिकारी की होगी।
लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। 30 नवंबर के बाद अगर देय के भुगतान में देरी की गई तो संबंधित अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।
शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक विभिन्न अदालतों में पेंशन संबंधी करीब साढ़े नौ हजार मामले चल रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी उन शिक्षकों को होती है जिन्हें अपनी सेवा पूर्ण करने के बाद भी पेंशन जैसे अधिकारों के लिए चक्कर काटना पड़ते हैं।
इसके मद्देनजर लोक शिक्षण आयुक्त द्वारा जारी निर्देशों में संबंधित अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा गया है कि 30 नवंबर के बाद अगर सेवानिवृत्ति पर देय राशि का भुगतान पर नहीं किया जाता तो देर करने वाले अधिकारी के विरुद्ध कर्तव्यों में लापरवाही बरतने के कारण अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
हाल में स्कूल शिक्षा विभाग की संभागीय स्तर पर हुई बैठकों में यह तथ्य सामने आया कि विभाग में अपनी सेवा पूर्ण करने पर कई अधिकारी, कर्मचारियों और शिक्षा संवर्ग को पेंशन और ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं हो रहा है। इसलिए यह तय किया गया कि बकाया राशि के आकलन के लिए रिटायरमेंट वाली तारीख के एक साल पहले ही प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट कहा गया है कि निर्धारित समय सीमा में शिक्षकों के पेंशन प्रकरण तैयार कर सेवानिवृत्ति तारीख को ही उनके सभी भुगतान की कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस के प्रांत अध्यक्ष रामनरेश त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के कर्मचारी पेंशन प्रकरणों के मामलों को जानबूझकर लटकाते हैं। पिछले दो सालों से स्थिति और भी बदतर हो गई है। श्री त्रिपाठी ने बताया कि पेंशन शिक्षक का अधिकार है, लेकिन उसे अपने अधिकार के लिए अफसरों के चक्कर काटना पड़ते हैं।
>> जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि शिक्षकों के रिटायर होने पर उनके भुगतान उसी दिन कर दिए जाएं। इसके लिए रिटायरमेंट की तारीख के एक साल पहले से ही प्रक्रिया शुरू करना होगी। जिससे मामले पेंडिंग न रहें। विलंब की स्थिति सामान्यत: नहीं निर्मित होना चाहिए। 30 नवंबर के बाद अगर भुगतान सेवानिवृत्ति तारीख पर नहीं किया जाता तो लापरवाही के कारण संबंधितों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।
एसएन मिश्रा, आयुक्त, लोक शिक्षण