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भाजपा-कांग्रेस में ‘तू-तू, मैं-मैं’

नई दिल्ली. एटमी करार पर सरकार और भाजपा के बीच चल रही बयानबाजी ने ‘तू-तू,मैं-मैं’ की शक्ल अख्तियार कर ली है। बात अब करार तक सीमित नहीं है, बल्कि दशकों पुराने मुद्दे उछाल कर एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। भाजपा ने जहां पार्टी के बारे में प्रधानमंत्री की टिप्पणियों को उनकी हताशा और मानसिक दिवालियापन करार दिया है, वहीं कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर छींटाकशी को असभ्य और राष्ट्र का अपमान बताया है और माफी मांगने को कहा है।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि प्रधानमंत्री का भाजपा के खिलाफ जहर उगलना आपत्तिजनक है। प्रधानमंत्री ने करार पर नाकामयाबी को छिपाने के लिए भाजपा को बेवजह निशाना बनाया है। सनद रहे कि प्रधानमंत्री ने गुरुवार को विदेश यात्रा से लौटते वक्त कहा था कि भाजपा को उनसे इस्तीफा मांगने का नैतिक हक नहीं है। उन्होंने कारगिल जंग, गुजरात दंगों और भारत-पाक आगरा शिखर वार्ता की विफलता के लिए राजग सरकार की जमकर आलोचना की थी।

रविशंकर उवाच :
‘प्रधानमंत्री ने अपना कैरियर टीचर के रूप में शुरू किया। इसके बाद वे सरकारी सेवा में आए। राजनीति में उन्होंने काफी देर से कदम रखा। उनका राजनीति में आना उतनी ही बड़ी गलती थी, जितना कि प्रधानमंत्री पद पर पहुंचना। किसी विचाराधारा या वचनबद्धता की बजाय अवसरवादिता ही उनकी राजनीति की पहचान रही है।’

कांग्रेस की नसीहत :
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने रविशंकर को इस बयान के बाद नसीहत देते हुए कहा कि भाजपा पदाधिकारियों को अपना मानसिक संतुलन नहीं खोना चाहिए। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख वीरप्पा मोइली ने कहा कि रविशंकर का बयान ‘असभ्यता’ की श्रेणी में आता है। उन्हें इससे बाज आना चाहिए।

भाजपा के तीखे सवाल :
* अगर गुजरात दंगे नरसंहार हैं तो प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि 1984 के सिख विरोधी दंगों को क्या कहा जाएगा?
* सिखों के नरसंहार में लिप्त कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर को सीबीआई ने क्लीनचिट कैसे दे दी?
* आगरा शिखर वार्ता में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दृढ़ता का परिचय देते हुए सीमा पार आतंकवाद पर समझौता करने से मना कर दिया था, फिर उसे विफल कैसे कहा जा सकता है?
* भारत की फौजों ने कारगिल में पाक घुसपैठियों को भागने को मजबूर कर दिया था। इससे पाकिस्तान की पूरी दुनिया में किरकरी हुई, फिर प्रधानमंत्री कैसे कह सकते हैं कि तत्कालीन सरकार सोती रही?
* 1962 में चीन के साथ युद्ध में भारत ने काफी जमीन खोई, जो आज तक प्राप्त नहीं हो सकी है। कांग्रेस ने इसके लिए क्या किया?

पीएम के दावे पर वामदलों को आपत्ति : वामदलों ने प्रधानमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शुक्रवार को कहा कि करार सियासी मसला है, जिसका फैसला कैबिनेट में नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने टिप्पणी की थी कि ‘123 समझौते’ को मंजूरी देने की कैबिनेट प्रक्रिया में यूपीए के सहयोगी दलों को भी विश्वास में लिया गया था। वामदलों ने इस दावे को ‘छल’ करार दिया।

* ‘बस, अब बहुत हो चुका। कांग्रेस को साझा समिति की 22 अक्टूबर को होने वाली बैठक में अपना रुख साफ कर देना चाहिए।
- डी राजा, भाकपा के राष्ट्रीय सचिव

* ‘हमें पता है सरकार फिलहाल करार पर अमल नहीं कर रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अच्छा फैसला लिया है। हम चाहते हैं कि सरकार अपना कार्यकाल पूरा करे।’
- ज्योति बसु , माकपा के बुजुर्ग नेता





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