जयपुर. एसटी-एससी के हजारों विद्यार्थियों को अब छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी। व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में पेमेंट सीट पर प्रवेश लेने वालों के साथ ही 12वीं में प्रथम श्रेणी हासिल नहीं कर पाने वाले विद्यार्थी भी छात्रवृत्ति के हकदार नहीं होंगे। अब तक एससी-एसटी के सभी छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती रही है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से उत्तर मैट्रिक (पोस्ट मैट्रिक) छात्रवृत्ति में संशोधन को लेकर ये आदेश 15 अक्टूबर को जारी किए गए हैं।
आदेशों में कहा गया है कि भारत सरकार की ओर से अनुसूचित जाति तथा जनजाति छात्रों के लिए मौजूदा सत्र से संशोधित नियम-कायदे मान्य होंगे। विभाग ने जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को पूर्व में जारी प्रपत्रों के साथ ही संशोधित छात्रवृत्ति के ब्यौरे के बारे में 31 अक्टूबर तक आवश्यक रूप से अवगत कराने के निर्देश दिए हैं।
एक लाख छात्र, 66 करोड़ की छात्रवृत्ति
प्रदेश में एसटी-एससी के करीब एक लाख छात्रों को पिछले साल 66 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति जारी की गई थी। विभाग के अधिकारियों की मानें तो नए नियम-कायदों लागू होने पर छात्रवृत्ति का फायदा बमुश्किल 8 से 10 फीसदी छात्रों को ही मिल पाएगा। अकेले जयपुर जिले में पिछले वर्ष 35 करोड़ की छात्रवृत्ति जारी की गई।
किसी ने लिया 3 प्रतिशत सैकड़ा पर ब्याज तो किसी ने बेटे के खातिर रखी जमीन गिरवी : एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र महेंद्र बुनकर ने अपनी आर्थिक स्थित खराब होने के बावजूद यह सोचकर प्रवेश लिया कि अनुरक्षण भत्ते के जरिए वह हालात से समझौता कर लेगा। पिता ने 3 प्रतिशत ब्याज पर पैसा लिया।
महेंद्र ने बताया कि यदि पैसा नहीं मिला तो उस जैसे कई छात्रों के सामने पढ़ाई का संकट पैदा हो जाएगा। यह परेशानी एमबीबीएस, बीडीएस, नर्सिग, एमएससी आईटी, इंजीनियरिंग, सीपीएल जैसे महंगे व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में छात्रवृत्ति के भरोसे पेमेंट सीट पर प्रवेश लेने वाले छात्रों के सामने है। कई ऐसे उदाहरण भी हैं जिसमें पढ़ाई के लिए ब्याज से और जमीन गिरवी रख अभिभावकों ने बच्चों के एडमिशन करवाए हैं।
बड़ी संख्या में राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र-
नए नियमों से राजस्थान विश्वविद्यालय के संबद्ध कॉलेजों के कई छात्र प्रभावित होंगे। प्राइवेट कॉलेजों में स्नातक कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे (12 वीं में प्रथम श्रेणी नहीं) एसटी-एससी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी। स्ववित्तपोषी पाठ्यक्रमों के तहत इवनिंग कॉलेजों में प्रवेश लेने वालों के लिए भी मुसीबत पैदा होगी।
* एसटी-एससी छात्रवृत्ति में संशोधन किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बड़ी संख्या में छात्रों की पढ़ाई छात्रवृत्ति के जरिए ही होती है। यह पूरे एसटी-एससी समुदाय पर कुठाराघात है। छात्रवृत्ति में छेड़छाड़ हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
-नरेश मीणा, पूर्व महासचिव, राजस्थान विश्वविद्यालय
पेमेंट सीट वालों को नहीं मिलेगी
* व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के मामलों में यह छात्रृवत्ति केवल फ्री सीट पर हुए प्रवेशित छात्रों को ही देय होगी। यह शर्त राजकीय एवं निजी शिक्षण संस्थाओं में समान रूप से लागू होगी।
* निजी शिक्षण संस्थाओं में जहां प्रवेश 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है, वहां कम से कम 60 प्रतिशत अथवा इससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थी ही छात्रवृत्ति के लिए पात्र होंगे।
* एसटी छात्रवृत्ति के मामलों में जो विद्यार्थी निजी शिक्षण संस्थाओं में 29 मई 2006 के पूर्व से अध्ययन कर रहे हैं, उन्हें इस अवधि से पूर्व देय फीस का ही भुगतान किया जाएगा।
अब तक होता रहा है
* यवसायिक पाठ्यक्रमों में फ्री एवं पेमेंट सीट पर प्रवेश लेने वाले सभी एसटी-एससी छात्रों को छात्रवृत्ति मिल रही थी।
* निजी शिक्षण संस्थाओं में जहां प्रवेश 12वीं कक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होता है, वहां छात्रवृत्ति की पात्रता के लिए प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण होने की पात्रता जरूरी नहीं थी।
* पहले प्रवेश की समय सीमा का बंधन नहीं था।
* गाइड लाइन केंद्र सरकार की ओर से जारी की गई हैं, इसमें राज्य सरकार का कोई दोष नहीं। निश्चित रूप से संशोधित नियम हजारों छात्रों के लिए मुसीबत बन जाएंगे। हमने केंद्र सरकार को अपना विरोध भी दर्ज कराया है।
—मदन दिलावर, सामाज कल्याण मंत्री