इंदौर. दुनियाभर के स्टूडेंट्स में ग्लोबल लीडरशिप डेवलप करने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था राउंड स्क्वेयर की 40वीं कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। इसमें अगले छह दिन तक अलग-अलग चर्चाओं के साथ स्टूडेंट्स सांस्कृति आपस में सांस्कृतिक आदान-प्रदान करेंगे। इसमें पहले दिन योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेकसिंह अहलुवालिया ने कॉन्फ्रेंस की थीम वसुधैव कुटुम्बकम पर संबोधन दिया।
इस अवसर पर कॉलेज में धीरूभाई अंबानी ऑडिटोरियम का लोकार्पण नीता अंबानी ने किया। वसुधैव कुटुंबकम का सही अर्थ समझाते हुए मोंटेक सिंह अहलुवालिया ने कहा पूरा विश्व एक परिवार की तरह है, जिसमें सभी देश आपस में जुड़े हुए हैं। यह भारत की 3000 साल पुरानी खोज है, जिसे विश्व ने अब जाकर समझा है।
इससे आने वाली पीढ़ियों को फायदा होगा। विश्व को तीन बातें ध्यान में रखना जरूरी है।
आध्यात्मिकता
विश्व भले ही अलग- अलग भागों में बंटा हुआ हो, लेकिन सभी देश एक है। यह सभी मानते हैं कि कोई ऐसी शक्ति है जो दिखाई नहीं देती लेकिन सबको नियंत्रित करती है। इस बात पर संपूर्ण विश्व एकमत है।
अर्थव्यवस्था
वर्तमान स्थिति में किसी न किसी रूप में विश्व के सभी देश निर्भर हैं। देशों की उन्नति और प्रगति के पीछे एक दूसरे का सहयोग ही है।
पर्यावरण
बढ़ती ग्लोबल वार्मिग और ग्रीन हाउस गैसों की चिंता ने विश्व को एक मंच पर ला दिया है। कार्बन के बढ़ते प्रभाव और ग्लेशियर की पिघलती बर्फ सभी के लिए चिंता का विषय बन गया है।
क्वेश्चन ऑफ द डे
कनाडा की स्टूडेंट जेकलिन मेरिन एल्डर ने जब मोंटेक सिंह अहलुवालिया से पूछा कि आप कहते हैं कि भारत विकसीत राष्ट्र बन जाएगा, लेकिन इस ऊंचाई पर किस तरह पहुंचा जा सकेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, आज भारत जिस स्थिति में है दस साल पहले कई विकसीत देश उस स्थिति में थे। देश इन दस वर्षो में दोगुनी प्रगति कर चुका है। दोगुनी गति से विकास करने की दर यदि निरंतर रही तो अगले 30-40 सालों में हम विकसित देशों की श्रेणी में खड़े होंगे।
भारत कैसे बनेगा विकसित राष्ट्र
राउंड स्क्वेयर में अपने संबोधन से पहले मोंटेकसिंह ने खास बातचीत में बताया भारत कैसे विकसित राष्ट्र बनेगा-।
विकास का फायदा
11वीं पंचवर्षीय योजना में विस्तृत व्यापक और सबके लिए योजना बनाई जा रही है, ताकि हर व्यक्ति को देश में हो रहे विकास का फायदा मिल सके।
एग्रीकल्चर
देश में कृषि क्षेत्र में जिस तरह की गति की जरूरत है वो नहीं आ पाई है। यह क्षेत्र अभी भी कमजोर है इसमें विकास की दर 4 प्रतिशत करना होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर
निवेश बढ़ सके इसलिए एयरपोर्ट, रोड, बिल्डिंग जैसी आधारभूत चीजें बढ़ाना होंगी। इसमें विकास की दर 9 प्रतिशत करना जरूरी है।
एजुकेशन
इंफ्रास्ट्रक्चर की इस विकास दर के लिए देश में क्षमतावान मानवशक्ति की जरूरत होगी। इसके लिए एजुकेशन विकास दर 9 प्रतिशत करना होगी। सेकंडरी एजुकेशन पर भी अभी बहुत ध्यान देने की जरूरत है। अभी तक 10 प्रतिशत स्टूडेंट्स ही इस स्तर तक पंहुच पाते हैं। इसे बढ़ाकर 21 प्रतिशत करना होगा।
हेल्थ
अनदेखी के कारण इस क्षेत्र की स्थिति में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है। देश में स्वास्थ सुविधाओं की स्थिति आज भी खराब है। अंतरराष्ट्रीय स्तर की स्वास्थ सुविधाओं को लाने की जरूरत है।
विदेशी निवेश
देश में विदेशी कंपनियों के आने से स्वस्थ माहौल तैयार होगा। हमने अपने दरवाजे देर से खोले हैं। बाहरी कंपनियों के आने से प्रतिस्पर्धा के लिए स्वस्थ वातावरण तैयार होगा और देश की कंपनियां भी बेहतर काम कर सकेगी।
अतिथि कौन-कौन
कार्यक्रम में ग्रीस के किंग कांस्टेनटाइन,सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराज नरेंद्रसिंह (झाबुआ), महाराज नागेंद्र सिंह (नैनौद), महाराजा गजसिंह (जोधपुर) व देवास के महाराज, पर्यटन मंत्री तुकोजीराव पंवार, उषा राजे होलकर व प्रिंस रिचर्ड ने भी शिरकत की।