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Shekhawati Shekhawati सीकर. पर्यटन को नई दिशा देने के लिए सहकारिता विभाग ने नई कवायद की है। अब दूर दिसावर से आने वाले सैलानियों को सरपंचजी कहेंगे ‘पधारो म्हारै देस’। इस कवायद के तहत राज्यभर में ग्रामीण स्तर पर ट्यूरिस्ट स्पॉट बनाए जाएंगे। योजना की खास बात यह होगी कि ग्राम सेवा सहकारी समिति पर्यटकों की मेजबानी करेगी।
सीकर, अजमेर, अलवर, चित्तौड़गढ़, दौसा, डूंगरपुर, राजसमंद, सवाईमाधोपुर, उदयपुर, कोटा, झुंझुनूं, जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर व बीकानेर के 26 गांवों को सहकारिता पर्यटन केंद्र के रूप में चिह्न्ति किया गया है। पर्यटन की ओर जब सहकारिता के कदम बढ़े तो योजना बनी ‘ग्रामीण सहकार पर्यटन’ की। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए अब सहकारिता विभाग ने कमर कस ली है। योजना के तहत सीकर जिले के हर्षनाथ में सहकारिता पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है। इससे पर्यटन बूम में शामिल होने का इंतजार कर रहे हर्ष पर्वत के भी दिन बहुरेंगे।
क्या होगा ट्यूरिस्ट स्पॉट में
स्थानीय ग्रामीण सहकारी समिति की ओर से हर्षनाथ में सहकारिता पर्यटन केंद्र बनाया जा रहा है। यहां पर्यटक दल के सदस्यों के बैठने के लिए झोंपड़ी होगी। इसमें घास-फूस का बिस्तर, मिट्टी से बनी बैठने की सीटों व मुड्ढों की व्यवस्था होगी। ठेठ मारवाड़ी संस्कृति के अनुभव के लिए मूंज की जेवड़ी से बनी चारपाई भी होगी। इसके अलावा शौचालय, पीने के लिए मिनरल वाटर, सोविनियर व गिफ्ट शॉॅप जिसमें हस्तशिल्प के सामान, टेराकोटा की मूर्तियां, सांगानेरी, बगरू व बाड़मेरी प्रिंट के कपड़े, मिट्टी के बर्तन उपलब्ध होंगे।
नया होगा सैलानियों के लिए
बकौल सहकारिता विभाग सैलानियों को आकर्षित करने के लिए कुछ नया करने की जरूरत है। ऐसी ही कवायद कोऑपरेटिव ट्यूरिस्ट स्पॉट में की गई है। अधिकतम तीस सदस्यों वाले पर्यटकों के दल को दो से तीन घंटे भ्रमण करवाया जाएगा। इस दौरान गांव के सरपंच, पंस सदस्य, जीएसएस अध्यक्ष व सदस्य सैलानियों का भाव-भीना स्वागत करेंगे। सैलानियों को बैलगाड़ी या ऊंटगाड़ी पर गांव का भ्रमण करवाया जाएगा। आंगनबाड़ी व उचित मूल्य की दुकान तक दिखाई जाएगी ताकि यहां के रहन-सहन से वे अवगत हो सकें। इसके अलावा ऐतिहासिक स्थल दर्शन व लोक कलाओं, गीत संगीत, नृत्य कठपुतली आदि भी दिखाया जाएगा, जिसके लिए लोक कलाकारों की व्यवस्था होगी।
तो चुना गया सहकारिता विभाग
ग्रामीण पर्यटन के विकास के लिए राज्य सरकार ने सहकारिता विभाग को चुना है। सहकारिता विभाग को योजना के संचालन के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा पर्यटक दलों की व्यवस्था का दायित्व ग्राम सेवा सहकारी समिति का होगा।
* इसी वित्तीय वर्ष में हर्षनाथ को सहकार पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर दिया जाएगा। सहकारिता विभाग के जुड़ने के बाद पर्यटन उद्योग को नए आयाम मिलने की उम्मीद है।
— धर्मपालसिंह प्रबंध निदेशक, सीकर केंद्रीय सहकारी