उदयपुर. हर साल दशहरे पर पुतला फूंक कर इसे भले ही बुराई के प्रतीक रावण का खात्मा समझा जाता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इस बात से इत्तेफाक
नहीं रखते हैं। यहां कृषि विभाग में सहायक कृषि निदेशक (विस्तार) सुधीर वर्मा ऐसे शख्स हैं, जिन्होंने अपनेजीवन में रावण के सिद्धांतों को आदर्श बना रखा है। वे कहते हैं जिसका उद्धार स्वयं भगवान राम के हाथों हुआ हो वो कभी नहीं मर सकता।
ऐसा नहीं है कि वे राम के आदर्शे को नहीं मानते, लेकिन उनकी नजर में रावण के सिद्धांत भी उतना ही महत्व रखते हैं जितने की राम के। जब भी वे तनाव या दबाव में होते हैं तो दशानन का स्मरण कर शांत हो जाते हैं। श्री वर्मा ने अपने ऑफिस के ब्रीफकेस में भी रावण का चित्र लगा रखा है। उनका मानना है कि यह चित्र उन्हें सदैव बुराई से लड़ने की प्रेरणा देता है। वे रावण के चरित्र से इतने प्रेरित हैं कि ब्रीफकेस में चित्र के पास ही लिखा है ‘ही इज द लार्ड मास्टर, डिजाईनर, आर्किटेक्ट, डायरेक्टर ऑफ माय हार्ट, सोल एंड माइंड’अर्थात यह मेरे दिल, आत्मा एवं दिमाग का गुरु, वास्तुकार, निर्देशक एवं निर्माता है। वर्मा को रावण का चरित्र तब से भाने लगा जब उन्होंने आचार्य चतुरसेन लिखित उपन्यास ‘वयं रक्षाम’ पढ़ा। पुस्तक में रावण के चरित्र के सकारात्कम पहलुओं को भी बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
इस किताब को तीन बार पढ़ चुके श्री वर्मा ने ‘भास्कर’ को बताया कि इस पुस्तक को पढ़ने के बाद मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। उनके अनुसार यह एक ऐसा पात्र है जिसका समाज में सिर्फ बुराई वाला पहलू देखा जाता है। वर्मा ने कहा कि रावण के सकारात्मक पहलू प्रेरणादायी होने का अर्थ यह नहीं है कि उनके जीवन में राम की महत्ता कम हुई हो, राम तो उनके लिए हमेशा पूजनीय है ही।