नई दिल्ली. पहले से ही भीड़भाड़ वाली रेगुलर और एसी स्लीपर बोगियों में कॉरीडोर के साथ बीच की बर्थ डाली जा रही है, ताकि और ज्यादा लोगों को यात्रा का मौका दिया जा सके।
थ्री टियर स्लीपर कोच में फिलहाल दो ही बर्थ होती हैं और यात्री एक दूसरे के सामने बैठ सकते हैं। रेलवे ने तय किया है कि इसमें बीच में एक और बर्थ रखी जाए।
फिलहाल नॉन एसी थ्री टियर स्लीपर में 72 बर्थ होती हैं और एसी थ्री टियर स्लीपर में 64 बर्थ। अब नॉन एसी स्लीपर में 9 और एसी थ्री टियर में 8 और बर्थ रखी जाएंगी। इसके लिए ऊपर वाली बर्थ को थोड़ा उठाकर बीच में एक बर्थ डाली जाएगी। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक दिन में ज्यादातर छोटी दूरी के अनारक्षित या वेटलिस्ट वाले यात्री इन पर बैठते हैं। उनका कहना था प्रयागराज एक्सप्रेस या लखनऊ मेल जैसी गाड़ियों के लिए कोई दिक्कत नहीं आएगी, क्योंकि वे देर रात चलती हैं और काफी सुबह अपने गंतव्य तक पहुंच जाती हैं।
इस अधिकारी का कहना था कि इससे आरक्षित बोगी में अनारक्षित लोग नहीं चढ़ पाएंगे क्योंकि उनके लिए अब उसमें जगह ही नहीं होगी। राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें जो राष्ट्रीय राजधानी को दूसरे राज्यों की राजधानियों से जोड़ती हैं, इस श्रेणी में शामिल नहीं की गई हैं।
भारतीय रेल के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर फॉर कोचिंग नीरज कुमार के मुताबिक इन बर्थ को लगाने के लिए पहले ही फंड्स जारी किए जा चुके हैं। हर कोच में इस फिटिंग पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च आएगा। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि रिसर्च डिजायन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गनाइजेशन ने भी स्लीपर्स में मौजूदा डिजायन में बदलाव की मंजूरी दे दी है।
एक अन्य अधिकारी के मुताबिक प्रयोग के बतौर झेलम एक्सप्रेस में एक्स्ट्रा बर्थ की पहले ही फिटिंग कर दी गई है और इसका काफी लाभ मिला है। इस वक्त रेलवे के पास 12500 नॉन एसी और 1500 एसी थ्री टियर स्लीपर्स हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस काम को बगैर रुटीन तोड़े धीरे-धीरे किया जाएगा। जब कोच सर्विसिंग के लिए वर्कशॉप में जाएंगे तभी उनमें बर्थ भी जोड़ दी जाएंगी।