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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior शिवपुरी. जिला अस्पताल मे मानवीय संवेदनाएं एकदम शून्य हो गई हैं और समय-समय पर इसके उदाहरण ही मिलते रहे हैं। ऐसा ही एक मामला शुक्रवार की शाम तब सामने आया, जब जिला अस्पताल में ड्यूटी डाक्टर ने बीमार जनादेश यात्री को दुत्कार कर भगा दिया। बात यहीं तक सीमित नहीं है कि कलेक्टर के निर्देश के बाद भी चिकित्सक ने बीमार यात्री के इलाज में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
जानकारी के अनुसार एकता परिषद के नेतृत्व में दिल्ली कूच करने वाली जनादेश यात्रा में शामिल करैरा अनुविभाग के ग्राम पारागढ़ निवासी लाखा आदिवासी (60) की अचानक तबियत बिगड़ गई। इस पर एकता परिषद के कार्यकर्ता लखन शर्मा इस आदिवासी को उप्र के बार्डर से शिवपुरी से लेकर आए।
शुक्रवार की शाम छह बजे के लगभग श्री शर्मा बीमार पद यात्री को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे तो यहां तैनात ड्यूटी डाक्टर ने उसका इलाज करने से मना कर दिया और उसे दुत्कार भगा दिया, जबकि लाखा आदिवासी की हालत ऐसी थी कि उसके मुंह से खून आने के साथ ही सीने और पेशाब नली में तेज दर्द हो रहा था।
बकौल श्री शर्मा, इस घटनाक्रम से हतप्रभ वे सीधे कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव के पास पहुंचे और उन्होंने विस्तार से पूरी बात बताई। इस पर कलेक्टर ने कहा कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन को इस संबंध में निर्देश दे दिए हैं, इसलिए बीमार पदयात्री के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
एकता परिषद के कार्यकर्ता लखन शर्मा का कहना है कि आज सुबह जब वह गंभीर रूप से बीमार लखना को लेकर जिला अस्पताल गए तो यहां पर डा. एलपी शर्मा उनके और बीमार यात्री के साथ अभद्रता से पेश आए। साथ ही उपचार में भी आनाकानी की। बड़ी मुश्किल से उन्होंने लाखा आदिवासी को देखा और उपचार की औपचारिकता पूरी करते हुए उसे मेडिकल वार्ड में भर्ती किया।