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2196 ने ठुकराई नौकरी

इंदौर. इंदौर जिले के लिए चयनित 2911 में से 2196 संविदा शिक्षक स्कूलों तक नहीं पहुंचे। इसका मुख्य कारण कम वेतन, काम का अधिक बोझ और नौकरी की अनिश्चितता भी है। अब नए सिरे से शिक्षकों की तलाश है। इस साल भी जनपद पंचायतों, जिला पंचायत और नगर निगम ने संविदा शिक्षक वर्ग-एक, दो और तीन 2911 पदों के लिए विज्ञापन निकाले थे।

लंबी भर्ती प्रक्रिया से गुजरने के बाद चयनित 715 संविदा शिक्षक ही स्कूलों तक पहुंचे जबकि आवेदन हजारों आए थे। शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद कई महीने विभाग और बच्चे इंतजार करते रहे।

समय बीत जाने के बाद भी वे नहीं आए तो दोबारा काउंसलिंग का निर्णय लिया गया। इस पद के लिए पिछले सालों में भी यही स्थिति थी। करीब 20 प्रतिशत संविदा शिक्षक ऐसे भी हैं जो तीन साल तक काम की शर्त के बाद भी बीच में ही नौकरी छोड़ गए।

भृत्य से कम वेतन
संविदा शिक्षक वर्ग तीन में चयनित राजेंद्र जैन ने बताया प्राइवेट नौकरी करते हुए सोचा था सरकारी नौकरी का मौका मिलेगा। बाद में 2500 रुपए वेतन पर विचार किया तो पाया शासकीय भृत्य से भी कम है। उसे भी 5500 रुपए मिलते हैं इसलिए निर्णय बदल दिया।

क्या है समस्या
राज्य शिक्षाकर्मी संघ के संभागीय संयोजक भारत भार्गव ने बताया तीन साल के कॉन्ट्रेक्ट के बाद भी भविष्य सुरक्षित नहीं है। शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-दो के संविदा शिक्षक संजय शर्मा ने बताया स्कूल में व बाहर काम तो स्थायी शिक्षकों के समान ही कराते हैं लेकिन सुविधाएं नहीं देते। शासकीय माध्यमिक विद्यालाय, देपालपुर के संविदा शिक्षक मनीष कारगीवाल ने बताया कभी-कभी तो एक-दो महीने रोककर वेतन दिया जाता है।

किस वर्ग में कितने संविदा शिक्षक
वर्ग चयनित पहुंचे वेतन
एक 139 10 4500
दो 791 129 3500
तीन 1981 576 2500

>> संविदा शिक्षकों के खाली पदों के लिए फिर काउंसलिंग की जाएगी। ज्यादातर नियुक्तियां ग्रामीण क्षेत्रों में की जाती है इसलिए वे नहीं जाते। वेतन कम होने की बात भी एक कारण है।
-आशुतोष अवस्थी, सीईओ जिला पंचायत व अपर संचालक शिक्षा





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