इंदौर. ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के पहले सुखलिया पुल का एक हिस्सा पूरा करना इंदौर विकास प्राधिकरण के लिए चुनौती बन गया है। इंजीनियर एक दिन में चार-चार विजिट कर रहे हैं और करीब सवा सौ लोग दिन-रात काम में जुटे हैं।
24 अक्टूबर तक यह हिस्सा चालू होने का दावा किया जा रहा है। पुल का काम अगस्त 2006 से सितंबर 2007 के बीच पूरा होना था लेकिन तकनीकी दिक्कतों और बारिश के कारण रह-रहकर रुकावट आती रही।
समिट से पहले प्राधिकरण ने पुल की एक लेन ट्रैफिक के लिए खोलना तय किया। रास्ता तैयार है लेकिन बारीक गिट्टी और डामर का फाइनल कोट बाकी है। फुटपाथ के साइड में जालियां भी नहीं लगी हैं। लगने के बाद उनका रंगरोगन होगा। 1.79 करोड़ लागत के इस पुल का कैरेज-वे (सड़क) 10.5 मीटर और फुटपाथ दो मीटर चौड़ा है।
आज कम मजदूरों से होगा काम
पुल का काम देख रहे सहायक यंत्री अजरुनसिंह शाक्यवार ने बताया दशहरे की छुट्टी के बावजूद रविवार को पुल के काम में कम मजदूर रहेंगे। हालांकि हम छुट्टी के दिन मजदूरों से काम लेना नहीं चाहते लेकिन समिट के मद्देनजर ऐसा करना पड़ रहा है। सोमवार को बारीक गिट्टी और फाइनल कोटिंग का काम होने के बाद मंगलवार से जालियां लगेंगी। उसी दिन सुखलिया चौराहे पर सील कोटिंग भी हो जाएगी।
उद्योग मंत्री की दावत 25 को
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के ठीक पहले 25 अक्टूबर को उद्योग मंत्री जयंत मलैया उद्योगपतियों के सम्मान में रात्रिभोज देंगे जिसमें करीब 500 लोगों के शामिल होने की संभावना है। अभी तक यह भोज रेसीडेंसी कोठी पर होने की चर्चा थी लेकिन जगह बदली जा सकती है।
संभावना है किसी बड़ी होटल में यह भोज हो। उसी दौरान मंत्री, अधिकारी और मेहमान उद्योगपति प्रदेश में निवेश की संभावनाओं और समिट पर चर्चा करेंगे। एडीएम रमेश भंडारी ने भोज के लिए मेनू बनाने और नया आयोजन स्थल तलाशने की जानकारी दी।
रेसीडेंसी का काम अंतिम चरण में
समिट के लिए रेसीडेंसी कोठी को संवारने का काम अंतिम चरण में है। लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर पी.सी. अग्रवाल ने बताया कोठी को कालीनमुक्त कर फ्लोरिंग बदल दी है। रंगरोगन भी पूरा हो गया है। कुछ छोटे-छोटे काम बचे हैं, वे दो-तीन दिन में पूरे कर लिए जाएंगे। नया ट्रांसफॉर्मर भी लग गया है। सभी कामों पर 90 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
उद्योगपति बोले- लंबी प्रक्रिया से मुक्ति दें
>> समिट अच्छा प्रयास है पर यह कारगर तभी होगी जब सरकार इन प्रयासों को बरकरार करेगी। हमारे प्रदेश में बिजली की स्थिति महाराष्ट्र और यूपी से अच्छी है इसलिए निवेश आने की पूरी संभावना है। सरकार को चाहिए कि प्रदेश में उद्योग चला रहे लोगों से राय-मशविरा करे। निवेश लेकर आने वाले मेहमान को लंबी सरकारी प्रक्रिया से मुक्ति देना चाहिए। समय-सीमा में काम नहीं होगा तो हम पिछड़ेंगे। तेज काम करने के लिए सरकारी तंत्र सुधारना होगा।
-विजय नाहर, मैनेजिंग डायरेक्टर कंबाइंड इंजीनियरिंग, पीथमपुर
संभावनाओं की मार्केटिंग नहीं हुई
>> प्रदेश में संभावनाएं बहुत हैं लेकिन अब तक उनकी मार्केटिंग नहीं हुई थी। समिट के माध्यम से सरकार उद्योगपतियों को पॉजीटिव सिगनल दे रही है। यहां एजुकेशन हब है, अन्य राज्यों के बनिस्बत औद्योगिक शांति और अच्छा मैनपावर है। इंडस्ट्री पॉलिसी-2004 में जल्दी संशोधन किए जाना चाहिए। ब्यूरोक्रेसी को भी सुधारें ताकि उद्योगपतियों को कस्टमर की तरह डील करें। कनेक्टीविटी में इंदौर कमजोर है इसलिए पीथमपुर एसईजेड पूरी तरह पनप नहीं पाया।
महेश मित्तल, चेयरमैन, ऑल इंडिया मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (मप्र बोर्ड)
नीति सुधारने पर ही आएगा निवेश
>> समिट इन्वेस्टर्स को लाने में तो सफल होगी पर निवेश तभी आएगा जब सरकार नीतिगत सुधार करेगी। लैंड अलॉटमेंट जल्द हो और उद्योगपतियों को भटकना न पड़े। समिट के बाद निवेशकों का लगातार फॉलोअप भी हो। राऊ में रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज का निर्माण जल्द शुरू होना चाहिए।
अजय सेवेकरी, डायरेक्टर, ब्रिजस्टोन