इंदौर. विजयादशमी के एक दिन पहले ही लोगों ने ‘पुलिसिया रावण’ का दहन और ‘मान’ मर्दन कर दिया। दिनदहाड़े गुंडागर्दी, चोरी, डकैती, लूट, हत्या के अपराधियों को रोक पाने और जनता को सुरक्षा देने में विफल पुलिस की मौजूदा करतूत ने उस पर ‘सीनाजोरी’ का तमगा भी जड़ दिया है और ‘सत्यमेव जयते’ की तख्ती सड़क पर, चौराहे पर वसूली में जुटे अमले पर किसी राक्षस की तरह अट्टहास कर रही है।
हिरासत में मौत के बाद शनिवार सुबह भड़के लोगों ने हीरानगर थाने में जमकर तोड़फोड़ की और पुलिसकर्मियों के वाहन फूंक दिए। थाने में मौजूद जवानों ने हवालात में दुबककर जान बचाई तो कुछ देर बाद पहुंचे टीआई को लोगों ने बाहर से ही खदेड़ दिया। थाने का कोई खिड़की-दरवाजा या सामान साबुत नहीं बचा। कारण चोरी का आरोप लगाकर थाने लाए गए खातीपुरा के घनश्याम मंडलोई की मौत।
उसे शुक्रवार शाम पेड़ से बांधकर बेरहमी से तब तक पीटा गया जब तक कि वह चक्कर खाकर गिर न पड़ा। इसका विरोध करने के लिए शनिवार सुबह मृतक के संबंधी और अन्य लोग थाने पहुंचे और थाने पर हमला बोल दिया।
करीब आधे घंटे बाद पुलिस बल पहुंचा तब तक थाने का सारा सामान मलबे में तब्दील हो चुका था। एसपी ने टीआई दयालुप्रसाद अहिरवार, आरक्षक शैलेंद्रसिंह जादौन, शैलेंद्रसिंह सिसौदिया, रवि यादव और नाथू यादव को निलंबित कर दिया है।
मौत की मजिस्ट्रियल (दंडाधिकारी) के साथ ज्यूडिशियल इन्क्वायरी (न्यायिक जांच) भी होगी। जिला एवं सत्र न्यायाधीश (डीजे) ने न्यायिक जांच के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मोहम्मद मूसाखान को नियुक्त किया है। जांच के बिंदु भी तय कर दिए हैं।
शनिवार शाम खातीपुरा निवासी घनश्याम पिता विक्रम उर्फ नानूराम मंडलोई के घर हीरानगर थाने के प्रधान आरक्षक अजीतसिंह, आरक्षक शैलेंद्रसिंह जादौन और शैलेंद्रसिंह सिसौदिया पहुंचे और उसे पीटने लगे। पीटते-पीटते ही थाने ले आए।
वहां रात करीब 8 बजे हालत बिगड़ने लगी तो एम.वाय. अस्पताल ले गए, जहां मृत घोषित कर दिया गया। उसकी मौत कैसे हुई? इसका जवाब देने से शुक्रवार रात जिम्मेदार पुलिस अफसर बचते रहे। देर रात मंडलोई परिवार को सूचना मिली तो वे समझ ही नहीं पाए क्या हो गया। चचेरे भाई मेहरबानसिंह व आसपास के लोगों का कहना था पुलिसकर्मी उसे निजी कार में बैठाकर ले गए थे और काफी देर बाद थाने पहुंचे।
परिजन थाने पहुंचे तब पुलिसकर्मी टीआई अहीरवार के सामने ही घनश्याम को पेड़ से बांधकर पीट रहे थे और वह बुरी तरह कराह रहा था। वह निढाल होकर गिर पड़ा तब पुलिसकर्मी घसीटते हुए अंदर ले गए। उस दौरान परिजन उसे छोड़ने के लिए गिड़गिड़ाते रहे तो कह दिया चोरी का आरोपी है। इस बीच उसने पानी मांगा तो मुंह में एक-दो बूंद टपकाते रहे और परिजन को भगा दिया। इसके कुछ देर बाद ही घनश्याम की मौत की सूचना मिली।
इस वारदात को लेकर खातीपुरा, गौरीनगर, सुखलिया गांव व आसपास की बस्तियों में रोष फैल गया। सैकड़ों लोग विरोध जताने थाने पहुंचे तो वहां तीन पुलिसकर्मी थे। लोगों ने घुसते ही पथराव शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों ने रोकना चाहा तो उन्हें पीटने लगे।
इस बीच एक समूह ने थाने की खिड़कियों और दरवाजे के कांच फोड़ दिए। फिर अंदर घुसे लोगों ने सारे कम्प्यूटर, फोन, फर्नीचर, आलमारियां तोड़ी और कागजात भी फेंक दिए। टीआई का कक्ष भी पूरी तरह तहस-नहस कर दिया गया।
टीआई भागे, पुलिसकर्मी हवालात में घुसे
वहां मौजूद तीनों पुलिसकर्मियों को भीड़ ने घेरकर पिटाई शुरू की तो दो हवालात में घुस गए। तभी वहां बंद दो बदमाश भाग निकले। तीसरे पुलिसकर्मी ने हवाई फायर किए लेकिन बच नहीं पाया। लोग उसे पिटते रहे और अंतत: उसे भागना ही पड़ा।
घनश्याम की मौत के बाद रातभर थाने में ही डटे रहे टीआई अहीरवार कुछ देर पहले ही एच.एन. गुरु के साथ रवाना हुए थे। सूचना मिलने पर थाने आए तो भीड़ उन पर लपकी। तब वे घबराए और गली-कूचों से भागकर जान बचाई।
वाहन भी जला दिए
तोड़फोड़ के बाद लोगों ने थाना परिसर में रखे आधा दर्जन दोपहिया वाहनों में आग लगा दी और कई कारों के कांच भी फोड़े। इसके बाद ही किसी ने कंट्रोल रूम फोन किया।
आधे घंटे बाद पहुंचा फोर्स
इसके आधे घंटे बाद एडीएम रमेश भंडारी, एडीशनल एसपी मनोज श्रीवास्तव, सीएसपी जी.पी. पाराशर, टीआई टी.एस. बघेल, जयंत राठौर, के.सी. मालवीय, एच.एन. गुरु सहित छह थानों का बल पहुंचा तब तक थाना तबाह हो चुका था।
कुछ देर बाद एसटीएफ पहुंची और लोगों को खदेड़ने कोशिश की लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। उनका कहना था जब से अहीरवार टीआई बने हैं रोज लोगों को अकारण परेशान किया जाता है। थाने में पेड़ से बांधकर पिटाई करना आम बात है। किसी भी निदरेष को पकड़ लाते हैं और रुपए लेकर ही छोड़ते हैं।
इस बीच विधायक महेंद्र हार्डिया, पार्षद राजेंद्र राठौर, विजयलक्ष्मी श्रीवास्तव व कांग्रेस प्रवक्ता राजेश चौकसे थाने पहुंचे तो लोगों ने उन्हें घेर लिया और टीआई व दो दोषी पुलिसकर्मियों को निलंबित कर हत्या का केस दर्ज करने की मांग करने लगे।
इस पर नेताओं ने अधिकारियों से बात की। कुछ देर बाद एडीएम ने टीआई व दो अन्य के निलंबन की घोषणा की। इसके बाद भी लोग उन पर धारा 302 लगाने की मांग पर अड़े रहे।
मीडिया को रोकते रहे अधिकारी
इस घटना का कवरेज करने पहुंचे मीडियाकर्मियों को भी पुलिस अधिकारियों ने रोक दिया। वे तबाह थाने के दृश्य दिखाने से रोकना चाहते थे। इस पर मीडियाकर्मियों से तीखी बहस भी हुई। तब आसपास के लोगों ने भी विरोध किया और कहा पुलिस सच्चाई दबाना चाहती है। इसके बाद उग्र भीड़ मीडिया के साथ अंदर घुसी तब तोड़फोड़ शूट की जा सकी।
कलेक्टर-एसपी पहुंचे
करीब सवा दस बजे कलेक्टर विवेक अग्रवाल व एसपी अंशुमान यादव वहां पहुंचे और लोगों से कहा हम उचित कार्रवाई करेंगे लेकिन अभी आप चले जाएं। यह बात किसी ने भी नहीं मानी। बाद में अधिकारी मृतक के परिजन, संबंधियों और पार्षद राठौर को चर्चा के लिए कंट्रोल रूम ले गए।
अस्पताल में भी फोर्स
उधर, एम.वाय. अस्पताल में भी भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। डॉक्टर्स की टीम ने परिजन की मौजूदगी में पोस्ट मार्टम किया। इसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई। शाम 4 बजे पुलिस वाहनों के काफिले के साथ उसका शव घर लाया गया।
पुलिस को देखते ही लोग फिर भड़क उठे। इस पर पार्षद हरिशंकर पटेल ने अधिकारियों को कहा वे गांव में नहीं आए। शाम 5 बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया। घटना के विरोध में खातीपुरा, गौरीनगर, हीरानगर सहित आसपास के बाजार बंद रहे।
लथपथ जवान ने लवकुश में ली शरण
भीड़ से बचकर भागा खून से लथपथ जवान महेश व्यास लवकुश आवास विहार में रमेशचंद्र दुबे के घर (ई-107) में जा घुसा। उसे देख परिजन घबरा गए। बाद में स्थिति समझकर श्री दुबे ने उसे रिक्शे में बैठाकर अस्पताल रवाना किया। घटना के करीब ढाई घंटे बाद तक दो घायल जवान खून बहने के बाद भी थाने में ही दुबके रहे। सवा ग्यारह बजे बाद भीड़ छंटी तब इलाज के लिए भेजा गया।
भैंस को लेकर हुआ विवाद और..
घनश्याम के करीबी लोगों का कहना था कि उसने पिछले दिनों एक भैंस खरीदी थी, जिसके पैसे बाकी थे। उसकी वसूली के लिए कुछ लोगों ने पुलिस जवानों को मोहरा बनाया। ये जवान थोड़े से लालच में पड़कर घनश्याम को घर से उठाया और जवान शैलेंद्र सिसौदिया की निजी मारुति कार में बैठाकर कहीं ले गए। उसके काफी देर बाद थाने पहुंचे और पेड़ से बांधकर लात-घूंसे और लाठियां बरसाने लगे।
परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया
घनश्याम, विक्रम उर्फ नानूराम मंडलोई का इकलौता बेटा था। एक बेटी भी है, दोनों की शादी हो चुकी है। घनश्याम का एक बेटा है। शाम को जब पुलिसकर्मी उसे ले गए थे परिवार को लगा था पूछताछ के बाद रात को ही छोड़ देगी लेकिन आई मौत की खबर। आधी रात को ही खबर पूरे गांव में फैली और लोग घरों से बाहर निकल आए थे। घनश्याम के माता-पिता को काफी देर बाद जानकारी दी गई।
पुलिस ने शुरू से ही मामले को टालने की कोशिश की। पहले कहा उसकी हालत पहले से खराब थी। फिर कहा उसने जहर खा लिया है। सूत्रों के मुताबिक कुछ पुलिसकर्मियों ने शुक्रवार को घटना के बाद किसी जीतू को धारा 151 में बंद करने की बात भी चलाई ताकि उसे गवाह बनाया जा सके।
दो साल में दूसरा मामला
पुलिस हिरासत में पिटाई से मौत का दो साल में दूसरा मामला है। इसके पहले तुकोगंज थाने में हरिजन कॉलोनी के वासु खरे की मौत ऐसे ही हुई थी। तब तत्कालीन टीआई एच.एन. गुरु सहित पांच पुलिसकर्मी निलंबित हुए थे। हिरासत में मौत का एक और मामला रावजी बाजार थाने का है जो जांच के नाम पर अधर में है।
एमवाय में मोर्चा संभाला तो थाने में तोड़फोड़ कर दीहीरानगर थाने पर पिटाई के बाद युवक की मौत के बाद पुलिस को अनहोनी की आशंका तो पहले से थी लेकिन स्थान का आकलन गलत साबित हो गया। पहले के अनुभवों को देखते हुए पुलिस मान रही थी नाराज लोग एमवायएच पहुंचेंगे।
इसके मद्देनजर वहां तगड़ा पुलिस बंदोबस्त किया गया था। पुलिस को सूचना थी शनिवार सुबह नाराज लोग पहले विधायक महेंद्र हार्डिया से मिलने जाएंगे। फिर आगे की रणनीति तय होगी। इसके मद्देनजर प्रशासन व पुलिस अफसरों ने विधायक से भी बात कर ली थी।
सूत्रों के मुताबिक सुबह खातीपुरा में एकत्र भीड़ विधायक निवास के लिए ही रवाना हुई थी लेकिन बीच में ही किसी ने कहा पहले थाने चलकर विरोध दर्ज करा दें फिर विधायक से मिल लेंगे। ये लोग थाने पहुंचे तब तक कारवां बहुत बड़ा हो गया था। उन्होंने थाने में घुसने की कोशिश की तो वहां मौजूद एक एएसआई व जवानों ने खदेड़ने के लिए लाठियां बरसाई जिससे भीड़ उग्र हो गई और उसने पुलिसवालों को खदेड़कर थाना ही तहस-नहस कर दिया।
हत्या का मुकदमा दर्ज हो
>> पूछताछ के नाम पर एक बेगुनाह को पुलिस पकड़ लाई और इतना मारा कि जान निकल गई। इस थाने में आए दिन ऐसी हरकतों की शिकायतें मिल रही थी और थानेदार नहीं सिपाही थाना चला रहे थे। इसकी जानकारी बड़े अफसरों को भी दी थी। मैं जनता के साथ हूं और टीआई व दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा हर हालत में दर्ज होना चाहिए। मुख्यमंत्री, गृहमंत्री तथा डीजीपी को भी वस्तुस्थिति बता दी है।
-महेंद्र हार्डिया, विधायक
पूरा समाज एकजुट
घनश्याम की मौत के बाद पूरा खाती समाज उसके परिजन के साथ खड़ा है। खातीपुरा क्षेत्र के पार्षद हरिशंकर पटेल, उनके भाई चंद्रशेखर पटेल, जिला युवक कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, युवा मोर्चे के पूर्व जिलाध्यक्ष जीतू जिराती पूरे समय सक्रिय रहे। श्री जिराती ने कलेक्टर-एसपी के सामने वस्तुस्थिति रखी तो कलेक्टर ने 30 दिन में मजिस्ट्रीयल जांच पूरी कर रिपोर्ट परिजन को भी सौंपने की बात कही।
मजिस्ट्रियल जांच पर्याप्त नहीं
हीरानगर थाने में पुलिस की पिटाई के बाद मौत की कड़ी निंदा करते हुए शहर कांग्रेस के स्थायी मंत्री द्वारकाप्रसाद चौबे ने मजिस्ट्रियल जांच को अपर्याप्त बताया और पीड़ित परिवार को पांच लाख रुपए सहायता देने की मांग की। सहायक स्थायी मंत्री राजकुमार जाधव ने इसे पुलिस की खुली गुंडागर्दी बताया और कहा इंदौर को बिहार बनाने की तैयारी की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों को बदलें
भाजपा के पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा ने बताया हीरानगर थाने में पुलिस हिरासत में मौत से अधिकारियों की मनमानी उजागर हुई है। उन्होंने प्रभारी मंत्री हिम्मत कोठारी से चर्चा कर पुलिस अधिकारियों को बदलने की मांग कीै जिससे अपराधियों में भय पैदा हो।
इन सवालों का जवाब दो?
चोरी के आरोप में हिरासत में लिए गए घनश्याम का परिवार खाती समाज के जाने-माने किसानों में से है। समाज के लोगों के मुताबिक 75 एकड़ जमीन का मालिक यह परिवार करोड़पति है।
उसके विरुद्ध पहले कोई भी अपराध दर्ज नहीं है। तो पुलिस ने किस आधार पर पकड़ा?
चचेरे भाई मेहरबानसिंह सहित कई लोगों ने उसकी बेरहमी से पिटाई होते देखी। तब टीआई भी वहीं थे।
लोगों के मुताबिक भैंस खरीदने को लेकर घनश्याम का किसी से विवाद था। ऐसा भी था तो बगैर रिपोर्ट के पुलिस ने कैसे बंदी बनाया?
घनश्याम को जब घर से ले गए थे तो वह बनियान और पैंट में था। रात को उसका शव अस्पताल पहुंचा तो उस पर पूरे कपड़े थे। यह कैसे हुआ?
भास्कर ने आईजी से पूछे पांच सवाल
मृतक के खिलाफ क्या कोई केस था?
- अभी तक तो कुछ पता नहीं चला।
यदि युवक वारदात में लिप्त भी था तो भी पुलिस सादी वर्दी में क्यों गई और निजी वाहन में क्यों लेकर आई?
- ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है। कई बार मामला उजागर न हो इसलिए पुलिस ऐसा करती है।
अब क्या करेंगे?
जांच के आदेश दिए हैं। मेडिकल रिपोर्ट बन रही है। जांच की वीडियोग्राफी भी हुई है। जिन लोगों ने थाने में घुसकर तोड़फोड़ की उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होगी।
लगातार चोरियां, लूट, हत्या और तनाव के बाद क्या आपको नहीं लगता पुलिस से शहर का विश्वास उठ गया है?
पुलिस पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। वह पूजा और नमाज में ही लगी है। इतने सारे आयोजनों मे किसी भी महिला के साथ कोई वारदात नहीं हुई। कैसे कह सकते हैं विश्वास उठ गया।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में प्रदेश की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है? क्या यह घटना नकारात्मक असर नहीं डालेगी?
हम पर विश्वास रखें, कार्रवाई होगी।