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वारदात करो, विदेश में सैटल करा देंगे

जालंधर. पंजाब के आतंकवादियों ने अपने पाकिस्तानी आकाओं की शह पर नए आतंकियों की भर्ती का नया तरीका ईजाद किया है। केंद्रीय खुफिया एजैंसियों के jalanमुताबिक आतंकवादी अवैध रूप से विदेश गए पंजाब के युवकों को अपने चंगुल में फांसते हैं और उन्हें पंजाब जाकर वारदात करने के लिए प्रेरित करते हैं। आतंकी संगठनों को पंजाब में अब समर्थन नहीं मिल रहा है। पंथ के नाम आतंक फैलाने वाले का साथ देने के लिए युवक तैयार नहीं हैं।

झांसा दिया विस्फोट कराया
जालंधर बस अड्डे पर बीते साल हुए बम विस्फोट में पकड़े गए सतनाम सिंह सत्ता को विदेश में सैटल करने का झांसा देकर नीटा ने वारदात करने के लिए प्रेरित किया था। दिल्ली के सिनेमाघरों में 2005 में हुए विस्फोट के मामले में पकड़े गए युवकों में अधिकांश युवक ऐसे थे, जिनको विदेश जाने का झांसा दिया गया था।

लुधियाना बम विस्फोट के मामले में जिस गुरप्रीत सिंह की तलाश पुलिस कर रही है, वह भी काम करने के लिए वर्क परमिट पर विदेश गया था। वहीं से एक नकली पासपोर्ट पर वह पाकिस्तान प्रशिक्षण लेने के लिए चला गया।

कबूतर बन उड़े आतंकवादी
मानव तस्करों और आतंकवादियों के बीच बीते तीन दशको से तालमेल है। दोनों 1978 से मिलकर काम कर रहे हैं। सबसे पहले दो बड़े आतंकवादी हरभजन सिंह और तरसेम सिंह मानव तस्करों के माध्यम से विदेश गए। उसके बाद 1981 में पंथक कमेटी का सदस्य रहा धन्ना सिंह और सुरेंद्रपाल सिंह अमरीका और कैनेडा जाने में सफल रहा। 1990 के आसपास कुख्यात आतंकवादी वधावा सिंह, परमजीत सिंह पंजवड़, लखबीर सिंह रोडे समेत करीब पांच सौ आतंकवादी भाग गए।

1998 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल की हत्या की साजिश में पकड़ा गया आतंकवादी दिलवर सिंह भी जमानत मिलने के बाद विदेश भाग गया था। मानव तस्करों की मदद से विदेश भागे अधिकांश बड़े आतंकवादियों ने अपने परिजनों को भी विदेश बुला लिया।

राजनीतिक शरण से शुरू हुआ सफर
दिल्ली दंगों के बाद विदेशों में पंजाब के लोगों को राजनैतिक शरण मिलनी शुरू हो गई थी। जिसका लाभ मानव तस्करों ने खूब उठाया। मानव तस्करों ने आतंकवादी संगठनों के लैटर पैडों की मदद से 35 हजार युवकों को विदेश में राजनीतिक शरण दिलाई। यह काम अभी भी जारी है। विदेशों में बसने की चाह में पंजाबी युवकों ने विदेश में खुद को खालिस्तान समर्थक कहना शुरू कर दिया है। अभी भी आतंकवादी दलों के लैटर पैड यहां और विदेशों में बिकते हैं।

ट्रैवल के भी उनके भी हैं एजैंट
यहां सक्रिय ट्रैवल एजैंट आतंकवादियों को जाली पासपोर्ट मुहैया कराते हैें। इसके साथ-साथ विदेशों में सक्रिय कुछ ट्रैवल एजैंट विदेश में अवैध रूप से रह रहे युवकों को आतंकवादियों के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।

नए रास्ते खोजे
मानव तस्करों ने युवकों को अवैध रूप से विदेश भेजने का नया तरीका निकाल लिया। युवकों को अब पहले मलेशिया और बैंकाक भेजा जाता है और वहां सक्रिय आईएसआई के एजैंटो के माध्यम से युवकों को पक्के तौर पर विदेश भेजने का झांसा दिया जाता है। खुफिया एजैंसियों की रिपोर्ट और पकड़े गए आतंकवादियों की हुई पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि यहां से इनको नकली पासपोर्ट पर दुबई और बाद में कराची भेजा जाता है।

लाहौर में प्रशिक्षण ले रहे 35 युवक
लाहौर की पुलिस लाइन में वधावा सिंह और नीटा ने एक कैंप शुरू किया हुआ है, जिसमें ऐसे ही 35 युवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस बात का खुलासा खुफिया एजैंसियों की रिपोर्ट में हुआ है।

विदेश में करते हैं धंधा
वधावा सिंह का मेवें का काम है। वह लाहौर में मुल्तान रोड पर कोठी में रहता है। परमजीत सिंह पजंवड़ वपरा टाउन में एक आलीशान कोठी मे रहता है और उसका ट्रांसपोर्ट का काम है। रोडे का जर्मनी में पैट्रोल पंप है। नीटा को भी आईएसआई ने ट्रांसपोर्ट के काम में लगा रखा है। इसी तरह इंगलैंड, अमरीका, कैनेडा, फ्रांस में बसे आतंकवादी जिन में वधावा का दामाद सतनाम सिंह फ्रांस में पीजा सैंटर चला रहा है। रेशम सिंह का जर्मनी में पैट्रोल पंप है। विदेशों मेंअवैध रूप से जा बसे इन आतंकवादियों की खुशहाली युवकों को प्रभावित करते है।

* आतंकवादियों और मानव तस्करों के बीच तीन दशक पुराना गठजोड़ है। अब अवैध रूप से विदेश गए युवकों को वारदात करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इकबाल सिंह एसएसपी, अमृतसर

* मानव तस्कर आतंकवादियों के मददगार रहे हैं।
ईश्वर सिंह डीआईजी, लुधियाना

* डिपोर्ट होने वाले युवकों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
एनपीएस औलख डीजीपी

नीटा ने कहा था- एक मारो, एक लाख रुपए लो
मुझे नीटा ने कहा था- एक मारो एक लाख लो। मैंने अमरीक सिंह नाम के ट्रैवल एजैंट को अमरीका जाने के लिए आठ लाख रुपए दिए थे। ट्रैवल एजैंट ने मुझे अमरीका की जगह युगांडा भेज दिया। वहां काम नहीं मिला। वहां मुझे अमरीका में रहने वाले आतंकवादी बलविंदर सिंह ने फोन कर कहा कि अगर मंै नीटा के लिए काम करूं तो मुझे विदेश में सैटल करा दिया जाएगा। मेरे पास और कोई चारा नहीं था।

इसके बाद मुझे पाकिस्तान भेज दिया गया। टिकट अमरीक सिंह ट्रैवल एजैंट ने मुहैया कराया। टिकट युंगाडा से भारत तक का था, पर रास्ते में मुझे कराची में उतार लिया और वहां से नीटा का साथी मुझे लाहौर ले गया। लाहौर में कैंप में मुझे आरडीएक्स और देसी दोनों तरीके से बम बनाने और हथियार चलने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण लेने के बाद मुझे पहले युगांडा भेजा गया। युगांडा से 28 अप्रैल 2006 को मैं भारत आ गया। -सतनाम सिंह सत्ता, जालंधर के बस अड्डा बम विस्फोट का आरोपी





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