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मप्र में मकोका जैसा कानून!

भोपाल. महाराष्ट्र के ‘मकोका’ की तर्ज पर मध्यप्रदेश में संगठित अपराध रोकने के लिए नया कानून लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। इस कानून का ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के कुछ प्रावधान, प्रस्तावित अधिनियम से प्रभावित होने के कारण राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद इसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किया गया मध्यप्रदेश संगठित अपराध एवं उच्छेदक गतिविधियां प्रतिशेध अधिनियम (एमपी आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड डिस्रप्शन एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट), महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट 1999 (मकोका) जैसा है।

सूत्रों के मुताबिक इसमें जिन अपराधों को शामिल किया जा रहा है उनमें आतंकवादी गतिविधियां, अपहरण, फिरौती के लिए अपहरण, नशीले पदार्थो की तस्करी, नशीले पदार्थो से संपत्ति कमाने, विघटनकारी गतिविधियों में शामिल होने, विस्फोट करने वाली गतिविधियां शामिल हैं।

टाडा और पोटा की समाप्ति के बाद भाजपा शासित राज्यों में इस तरह के कानून बनाने का विचार शुरू हो गया था। मकोका की तरह मप्र के प्रस्तावित अधिनियम में एक से अधिक अपराधियों द्वारा किए जाने वाले संगठित अपराध पर नियंत्रण करने की मंशा है।

एसपी के बयान गवाही के लिए मान्य
सूत्र का कहना है कि प्रस्तावित अधिनियम में एसपी द्वारा लिए जाने वाले बयान अदालत में गवाही के लिए मान्य होंगे। अभी किसी भी अपराध में पुलिस के बयान गवाही के लिए मान्य नहीं होते। इसमें पकड़े जाने वाले व्यक्ति के मजिस्ट्रेट के सामने भी बयान लिए जा सकेंगे।

साथ ही इस अधिनियम में गिरफ्तार होने वाले व्यक्तियों को चार महीने तक जमानत नहीं मिलेगी। इसके बाद अगर उन्हें जमानत दी जाती है तो पहले पुलिस का पक्ष सुना जाएगा।

विधि विभाग ने किया परीक्षण
सूत्र बताते हैं कि गृह विभाग द्वारा तैयार इस अधिनियम का विधि विभाग ने परीक्षण कर लिया है और कुछ बिंदुओं पर अपना मत दिया है। विभाग का कहना है कि अधिनियम के प्रावधानों के कारण दंड प्रक्रिया संहिता और साक्ष्य अधिनियम के प्रावधान प्रभावित होंगे।

चार महीने तक जमानत नहीं होने, एसपी के बयान गवाही के लिए मान्य किए जाने जैसे प्रावधानों पर विधि विभाग ने कहा कि इसके लिए राष्ट्रपति से स्वीकृति लेना जरूरी है। बताया जाता है कि जल्द ही इस अधिनियम को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लाया जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति के भेजा जाएगा।

>>- अधिनियम का प्रारूप तैयार हो गया है। पोटा और टाडा को समाप्त किए जाने के बाद आतंकवाद और इससे जुड़ी अन्य गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए दूसरे कानून की आवश्यकता थी। इसके कुछ प्रावधानों के कारण इसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा, जहां से स्वीकृति मिलने पर यह लागू होगा।
- हिम्मत कोठारी, गृह मंत्री

प्रस्तावित अधिनियम में सजा के प्रावधान और अन्य प्रमुख बिंदु

नशीले पदार्थ से किसी की मौत होने पर अपराधी को फांसी की सजा मिलेगी
अपराधी को सजा होने पर उसकी संपत्ति राजसात हो सकेगी
कम से कम पांच लाख रुपए का जुर्माना
अपहरण में 10 साल की सजा का प्रावधान
संगठित गिरोह के रूप में नशीले पदार्थो की तस्करी करने पर 10 साल की सजा
इसके लिए विशेष न्यायालयों का गठन होगा
सजा के बाद 90 दिन में अपील की जा सकेगी, जबकि आमतौर पर 60 दिन की अपील अवधि होती है





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