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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. सिटी ब्यूटीफुल में ब्रेस्ट कैंसर के सर्वाधिक मामले पाए गए हैं। हालात यह है कि यहां प्रति एक लाख पर ब्रेस्ट कैंसर के 39.5 केसेज हैं। यह चौंकाने वाली रिपोर्ट एटलस ऑफ कैंसर इन इंडिया के एक सर्वे में आई है।
हर साल सैकड़ों केस:
पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जरी के डॉ. गुरप्रीत बताते है कि यहां हर साल 500-600 केस आते हैं। इनमें 350 के करीब रोगियों की हर साल सर्जरी होती है। जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. हर्ष मोहन के मुताबिक जीएमसीएच-32 में हर साल लगभग 150 ब्रेस्ट कैंसर के मरीज आते हैं। इनमें करीब 145 को सर्जरी की जरूरत पड़ती है।
क्या है कारण :
कुछ रिस्क फैक्टर्स को इसका जिम्मेदार मान सकते हैं। इनमें वेस्टर्नाइजेशन का ज्यादा असर, अधिक मोटापा, कम बच्चे होना, देर से शादी, देर से मां बनना और मेनोपॉज देरी से होना आदि वजह अहम है।
जल्दी डिटेक्शन के फायदे :
ब्रेस्ट में थोड़ी भी परेशानी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि बीमारी का जल्दी पता लगने से ब्रेस्ट रिमूव होने से बच जाता है, क्योर होने के चांसेज ज्यादा होते हैं और ट्रीटमेंट पर कम कॉस्ट आती है।
कब होती है ब्रेस्ट रिमूव करने की जरूरत :
बीमारी के दूसरी या तीसरी स्टेज में पहुंचने पर मरीज को बचाने के लिए डॉक्टर के पास ब्रेस्ट रिमूव करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता।
ट्रीटमेंट का प्रोसेस :
डिपार्टमेंट ऑफ रेडियोथैरेपी एंड ऑन्कोलॉजी, पीजीआई के पूर्व हेड डॉ. बी. डी. गुप्ता के मुताबिक सर्जरी,रेडियोथैरेपी, कीमोथेरेपी से इस बीमारी का इलाज किया जाता है।
एडवांस्ड स्टेज में ब्रेस्ट कैंसर ट्रीटमेंट में रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी के कॉम्बीनेशन से इलाज किया जाता है। कई केसेज में लंबी दवाई से भी इलाज संभव है। फोर्टिस मोहाली के सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजी डॉ. राजीव बेदी के मुताबिक इस रोग के इलाज का मोटे तौर पर खर्च 25,000 से 25 लाख तक है।
बचाव के रास्ते भी हैं
40 साल बाद हर साल एक बार मैमोग्राफी और सर्जन से चेकअप करवाएं।
30 साल की उम्र के बाद हर महीने ब्रेस्ट की सेल्फ एग्जामिन करें।
गुड हेल्दी लाइफ स्टाइल अपनाएं, संतुलित खाना खाएं और रोज एक्सरसाइज करें।
>> जुलाई 1999 में मेडिकल चेकअप के बाद मुझे ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। डॉक्टर ने ब्रेस्ट रिमूव करने की सलाह दी। उस समय सिर्फ जान बचाने की फिक्र थी। इसलिए फौरन सर्जरी करानी पड़ी।
—रंजना तुलसी, रेजीडेंट सेक्टर-21
>> अक्टूबर 2003 का वह दिन नहीं भूलता जब सेल्फ एग्जामिनेशन में ब्रेस्ट में लम्प सा महसूस हुआ। चेकअप से पता चला कि ब्रेस्ट कैंसर है। शुक्र है कि फस्र्ट स्टेज में ही पता चल गया। सर्जरी से लम्प निकाल दिया गय और ब्रेस्ट बच बच गया।
—इंदिरा नरूला, रेजीडेंट, पंचकूला