उदयपुर. भीण्डर की क्रय-विक्रय सहकारी समिति के मैनेजर सीताराम अहीर को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने शनिवार को उसके मातहत कर्मचारी से 5
हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। मैनेजर को ट्रैप करने की कार्रवाई प्रतापनगर क्षेत्र में चाय की दुकान पर की गई।
सहकारी समिति के मैनेजर के खिलाफ यह कार्रवाई कानोड़ स्थित सहकारी मेडिकल स्टोर के सेल्समेन मनोज कुमार डूंगरवाल की शिकायत पर की गई। मनोज सहकारी विभाग में संविदा के आधार पर फार्मेसिस्ट है। उससे घूस वसूली करने वाला सहकारी मैनेजर चित्तौड़ जिले की गंगरार तहसील के जोजरों का खेड़ा गांव का रहने वाला है। मैनेजर को पांच सौ रुपए के दस नोट लेते शनिवार अपराह्न् पौने 3 बजे गिरफ्तार किया गया। प्रतापनगर से हिरासत में लेकर अभियुक्त को ब्यूरो चौकी लाया गया।
फार्मेसिस्ट मनोज डूंगरवाल ने सीताराम द्वारा 5 हजार रुपए घूस मांगने की लिखित शिकायत पिछले दिनों ब्यूरो अधिकारियों से की थी। शुक्रवार को शिकायत का सत्यापन किया गया जिसमें घूस की मांग सही लगी। ब्यूरो अधिकारियों ने मैनेजर को उदयपुर में ट्रैप करने की योजना बनाई। सीताराम शनिवार को प्रतापनगर स्थित सहकार भवन में एक मीटिंग में आया था। उसने मनोज को रिश्वत की राशि लेकर उदयपुर बुलाया।
एसीबी अधिकारियों के प्लान के मुताबिक सहकार भवन के पास एक चाय की दुकान पर खड़े होकर मनोज ने सीताराम को अपने आने की सूचना दी। मनोज का फोन सुनकर सीताराम सहकार भवन से एक स्कूटर पर चाय की दुकान पर पहुंच गया। मनोज ने जैसे ही 500 के दस नोट उसके हवाले किए ट्रैप पार्टी ने उसे दबोच लिया।
घूसखोरी की वजह
कानोड़ निवासी मनोज डूंगरवाल 15 अप्रैल 2000 को भीण्डर क्रय-विक्रय सहकारी समिति में संविदा के आधार पर नौकरी लगा था। 26 दिसंबर 2006 को मैनेजर सीताराम ने उसकी सेवा समाप्त कर दी थी। मनोज ने उक्त आदेश के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। जिस पर 25 जनवरी 2007 को उसे वापस नौकरी पर रख लिया। मई में उसका तबादला कानोड़ के सरकारी अस्पताल में संचालित सहकारी मेडिकल स्टोर पर सेल्समैन पद पर कर दिया गया। सीताराम ने तबादला करते समय यह शर्त रखी कि उसे प्रतिमाह 2 हजार रुपए घूस देनी होगी। कोर्ट में विचाराधीन मामले में भी पक्ष में गवाही देने का लालच दिया। पिछले दिनों मैनेजर सीताराम ने मनोज से मई से सितंबर तक पांच माह की रिश्वत 10 हजार रुपए मांगे। मनोज ने इतनी बड़ी राशि न होने की बात कही। तब सीताराम ने घूस की राशि में रियायत करते हुए 5 हजार रुपए देने को कहा।
पहले से बदनाम है सीताराम
एसीबी सूत्रों के अनुसार भीण्डर सहकारी क्रय-विक्रय समिति का मैनेजर सीताराम रिश्वत तथा हेराफेरी के मामलों में पहले से बदनाम है। पूर्व में भी उसके खिलाफ शिकायतें आई थीं मगर शिकायतकर्ताओं के आगे न आने से कार्रवाई नहीं की जा सकी।
टीम में थे
डीवाईएसपी विजेन्द्र व्यास के नेतृत्व में हैडकांस्टेबल हिम्मतसिंह तथा कांस्टेबल जितेन्द्र सनाढ्य, मुनीर खां, कंवरपाल व सुखदेव प्रसाद ने कार्रवाई की।