मुम्बई: प्रसिद्ध निवेशक फर्म मेरिल लिंच की एशिया-प्रशांत क्षेत्र की निवेश रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही भारत में विदेशी धन के फ्लो को कम करने के लिए सेबी ने एक नया प्रस्ताव तैयार कर लिया है, लेकिन चीन के साथ भारत में भी विदेशी निवेश रुकने वाला नहीं है। इसका कारण इन दोनों देशों में हो रहा तेजी से आर्थिक विकास माना जा रहा है।
संस्था के अनुसार जुलाई में अमेरिकी बाजार में आए सब प्राइम क्रेडिट क्राइसेस के बाद भारत में 6 अरब डॉलर का निवेश हुआ था, जबकि पिछले साल यह 8 अरब डॉलर था। अब पेंशन फंड और इंश्योरेंस कंपनियों का दौर: मेरिल लिंच के अनुसार अभी तक एशिया की विकासगाथा में पेंशन फंड और इंश्योरंेस कंपनियों का अध्याय शामिल नहीं है। इस सेक्टर को अन्य क्षेत्रों की तुलना में एशिया में अधिक रिटर्न मिलने की उम्मीद है। इसके चलते इस क्षेत्र में बड़े पैमाने में धन आने की संभावना बनी है।
एमएससीआई वर्ल्ड इंडेक्स में भारत और चीन सिर्फ 2.5 प्रतिशत के स्तर पर हैं, जबकि अमेरिका और यूरोप में यह 69.5 प्रतिशत है। यहां जिक्र अनिवार्य है कि भारत और चीन में यह क्षेत्र अभी अपनी प्रारंभिक अवस्था में है। धन हमेशा बाजार के आकार पर नहीं उसके मूल्यांकन के आधार पर लगाया जाता है।
एमएससीआई वर्ल्ड इंडेक्स मार्केट केपिटलाइजेशन इंडेक्स है, जो ग्लोबल मार्केट इक्विटी परफार्मेस का आकलन करता है।
संस्था के अनुसार भारत में रिलांयस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां निसंदेह बेहद महंगी हैं। लेकिन कार्यान्वयन बेहद अच्छा है। नतीजतन इस साल अब तक 4.3 अरब डॉलर कंपनी पर लगे।