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123 के काले बादल इंडो-फ्रेंच डील पर

मुंबई. भारत और अमेरिका के बीच 123 समझौते पर बनी अनिश्चितता की स्थिति से भारत और फ्रांस के बीच पहली बार हुए परमाणु व्यापार सम्मेलन पर काले बादल छा गए। भारत और फ्रांस द्वारा परमाणु क्षेत्र में आपसी सहयोग को मजबूती देने के मकसद से यह सम्मेलन हो रहा है।

फ्रांस के अफसरों ने कह दिया है कि वह भारत के साथ परमाणु सहयोग के लिए उत्सुक तो है लेकिन इंडो-यूएस करार को अमल में लाने के लिए आईएईए द्वारा निर्धारित पैमानों को अपनाए बगैर वह भारत के साथ कोई भी समझौता कर पाने की स्थिति में नहीं होगा।

यहां संपन्न हुए पहले इंडो-फ्रेंच परमाणु व्यापार सम्मेलन में भाग लेने आए फ्रांस के अफसरों ने कहा कि अगर भारत अमेरिका के साथ हुए 123 करार के अगले चरण के रूप में आईएईए के साथ सेफगार्ड समझौता नहीं करता तो फ्रांस और भारत के बीच नागरिक परमाणु सहयोग को लेकर कोई भी समझौता हो पाना असंभव ही है। इसके अलावा फ्रांस ने एक शर्त और रखी है और कहा है कि भारत को एनएसजी की हरी झंडी भी लेना होगी।

फ्रांस के अफसरों ने भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग को बताया हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच चर्चा जारी रहेगी लेकिन इन दोनों शर्तो को पूरा किए बगैर कोई भी कार्रवाई नहीं हो सकेगी। परमाणु ऊर्जा कॉपरेरेशन के एमडी एसके जैन ने कहा कि 123 करार पर लेफ्ट द्वारा अपनाए गए रवैये के कारण फ्रांस के साथ नागरिक परमाणु क्षेत्र में होने जा रहे समझौते पर बुरा असर पड़ा है।





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