नई दिल्ली. गांधी, नेहरू, पटेल और जिन्ना जैसी शख्सियतों ने भारत से ब्रिटिश राज की जड़ों को उखाड़ फेंकने के लिए महत्वपूर्ण लड़ाई लड़ी लेकिन यही एकमात्र कारण नहीं था कि ब्रिटिश राज खत्म हुआ। दरअसल पहले और दूसरे विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन की ताकत तो कमजोर हो ही गई थी और दक्षिण एशिया में प्रभुत्व की उसकी चाह भी।
ऐसा मानना है अमेरिका में कैनेडी शासनकाल में पूर्वी और दक्षिण एशियाई मामलों के उपसचिव रह चुके फिलिप्स टैलबॉट का। फिलिप्स ने अपनी किताब एक अमेरिकन विटनेस टू इंडियाज पार्टिशन में लिखा है कि सरदार पटेल ने क्षेत्रों के प्रावधान को लेकर पूरे भारत के लिए संविधान की योजना बनाई थी और उन्हें यकीन था कि एक साल के अंदर पाकिस्तान के कई क्षेत्र भारतीय संघ में शामिल होने को तैयार हो जाएंगे।
द एशिया सोसायटी, यूएस के अध्यक्ष 92 वर्षीय फिलिप्स 1939 से 1950 तक भारत में फेलोशिप के सिलसिले में रह चुके हैं। यहां उनकी किताब को पूर्व प्रधानमंत्री आईके गुजराल ने जारी किया।
फिलिप्स ने कहा कि पटेल ने उन्हें बताया था कि हम पूरे भारत के लिए एक संविधान बनाने के लिए तैयार हैं। मुस्लिम समुदाय को लगना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं। उनके लिए यह सबसे अच्छा विकल्प होगा कि वे यहां रहें और एकल संघीय शासन का हिस्सा बनें। फिलिप्स ने कहा कि पटेल शायद यह भी जानते थे कि विघटनकारी ताकतों में से कोई भी कामयाब नहीं हो सकेगी।