HomeBusinessCorporate Corporate

सेबी-एफआईआई की बैठक से आज तय होगी बाजार की दिशा

मुंबई. पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने नाटकीय उतार-चढ़ाव देखे। सवाल यह है कि 2007 में अप्रत्याशित तेजी देख चुके दुनिया के शेयर बाजार क्या 1987 sebiजैसी गिरावट दोहराने की तैयारी कर रहे हैं? क्या बीएसई में करेक्शन पूरा हो गया है? या सोमवार को सेबी और एफआईआई की बैठक फिर सेंसेक्स को तेजी की दिशा दे सकती है?

तेजी का चरम:
* बीएसई सेंसेक्स ने 18,000-19000 की यात्रा केवल चार सत्रों में कर ली थी।
* दुनिया के शेयर बाजार का एमएससीआई इंडेक्स 2007 में 14 फीसदी बढ़ गया है। पिछले चार में से तीन साल के दौरान इस इंडेक्स ने दोहरा अंक भी पास नहीं किया था।

बीएसई का रुख
सोमवार को एफआईआई और सेबी की बैठक में क्या नतीजा निकलता है, इस बैठक पर काफी कुछ निर्भर करता है। कार्वी स्टाक ब्रोकिंग के वाइस प्रेसिडेंट अंबरीश बालिगा का कहना है कि सारे संकेत नकारात्मक हैं, शुक्रवार को डो जोंस भी गिरा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार से कोई समर्थन नहीं मिल रहा है। अब सोमवार को सेबी और एफआईआई के बीच बातचीत से ही कोई नतीजा निकल सकता है।

बालिगा का कहना है कि बाजार के तेजी से चढ़ने का कारण एफआईआई का निवेश था। अगर एफआईआई नया धन नहीं लगाते हैं तो ऊपर की ओर जाना रुक जाएगा। मेप एडमिसी सिक्यूरिटीज के प्रमुख महेश भागवत का कहना है कि शेयर बाजार उम्मीद कर रहा है कि सेबी कुछ रियायतें दे। सेबी के दिशानिर्देश दिशा तय कर देंगे।

चिदंबरम के बयान का फायदा किसने उठाया?
वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बयानों ने छोटे निवेशकों को मुश्किल से बचा लिया है या ज्यादा समस्याएं पैदा कर दी हैं? पार्टिसिपेटरी नोट (पीएन) पर सेबी के सकरुलर के बाद पी चिदंबरम के बयान ने सेंसेक्स में दस फीसदी इजाफा कर दिया और बाद में यह 10 फीसदी से ज्यादा गिर गया। इसका फायदा किसने उठाया? ऊपरी स्तर पर एफआईआई ने बिकवाली की है, क्या उन्हें ऊंचे भाव पर निकलने का रास्ता नहीं मिल गया? पिछले तीन दिनों में एफआईआई ने कैश में 1 अरब डॉलर और इंडेक्स फ्यूचर में 2 अरब डॉलर की बिकवाली की है। वित्त मंत्री के तुरत-फुरत बयान से यह भी पता लगता है कि सेबी को कोई आजादी नहीं है।

नेता और बाजार
ऐसी बयानबाजी से यह भी सवाल खड़ा होता है कि नेता बाजार में हमेशा फील गुड बनाए रखना चाहते हैं। बीएसई में गिरावट के पीछे तेल की कीमतों, क्रेडिट संकट, ब्याज दरों व कंपनियों के मुनाफे को भी अतिरिक्त महत्व दिया जाता है। वास्तव में वित्त मंत्री के बयान ने शेयर बाजार में छोटे निवेशकों का नुकसान किया है। सेंसेक्स की वापसी के बाद एफआईआई को बाजार से बाहर निकलने का मौका मिल गया है। घरेलू फंड भारतीय निवेशक की रिटेल असेट का प्रबंधन ज्यादा देखते हैं, इसलिए नुकसान उनका है।





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: