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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. सरकार ने चार और विधायकों को संसदीय सचिव बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह बुधवार को कैबिनेट हाल में चारों नए संसदीय सचिवों को शपथ दिलाएंगे। जिन चार विधायकों को संसदीय सचिव बनाया जा रहा है,वे हैं देवलाल दुग्गा, सुभाउ कश्यप, संजीव शाह और श्रीमती रमशीला साहू। चार में से तीन आदिवासी वर्ग के विधायक हैं।
जाहिर है, सरकार आदिवासी वर्ग को बराबर प्रतिनिधित्व देने का संदेश देना चाहती है। यह भी कहा जा रहा है कि इनकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश की जा रही है। श्रीमती साहू को छोड़कर बाकी तीन विधायक गाहे-बगाहे सरकार के खिलाफ चलने वाले अभियान में शामिल होते रहे हैं। श्री दुग्गा ने कुछेक मौकों पर सार्वजनिक रूप से बयान भी दिया है।
मंत्रियों के खिलाफ दिल्ली में मोर्चा खोलने वाले विधायकों में भी इनका नाम आता रहा है। बहरहाल चुनावी तैयारियों के बीच इन नई नियुक्तियों के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। आदिवासी विधायकों की चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसीलिए कोरग्रुप की बैठकों में भी इन्हें महत्व दिए जाने पर चर्चा होती रही है।
अब आठ हो जाएंगे :
राज्य में पहले छह संसदीय सचिव हुआ करते थे, लेकिन सत्यानंद राठिया को राज्यमंत्री बनाने और महेश बघेल के निधन के बाद केवल चार संसदीय सचिव बचे हैं। पूनम चंद्राकर, डा. त्रिविक्रम भोई, छतराम देवांगन और रामसेवक पैकरा संसदीय सचिव हैं। नए संसदीय सचिवों को मिलाकर इनकी संख्या अब आठ हो जाएगी।
मंत्री नहीं बना सकते इसलिए..
मंत्रियों की संख्या 13 से अधिक नहीं हो सकती, इस कारण विधायकों को संसदीय सचिव बनाया जा रहा है। पहले रमन सरकार में 17 मंत्री थे 15 फीसदी की बाध्यता की वजह से चार मंत्रियों को हटाया गया था।
रेणुका और कमलभान को भी पद
पूर्व राज्यमंत्री व प्रेमनगर की विधायक रेणुका सिंह को सरगुजा विकास प्राधिकरण का उपाध्यक्ष बनाया गया है। विधायक कमलभान सिंह को राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया है। संसदीय सचिव बनाने का फैसला करने के साथ ही मुख्यमंत्री ने दो और आदिवासी विधायकों को महत्वपूर्ण पद देकर उनकी नाराजगी कम करने की कोशिश की है।
रेणुका सिंह को पहले मंत्री बनाया गया था लेकिन बाद में शिकायतों के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया। सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद से शिवप्रताप सिंह द्वारा इस्तीफा देने के बाद से यह पद खाली था। वैसे इस निर्णय से विरोधियों को झटका देने का एक संदेश भी देने का प्रयास किया गया है।
शिवप्रताप सिंह जब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे, तब रेणुका सिंह से उनकी दूरियां जगजाहिर हैं। ऐसे में रेणुका को पुरस्कृत कर श्री सिंह को राजनीतिक संदेश देने का प्रयास किया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री सिंह ने मुख्यमंत्री से नाराजगी के कारण सरगुजा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्हें पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया।