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उधारी में निपटा बस्तर दशहरा

जगदलपुर. बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा उत्सव इस साल उधारी में लिए सामान के भरोसे निपटा। दशहरे में जिन 70 से ज्यादा बकरों की बलि दी गई, वह भी उधार में लाए गए थे। राज्य शासन ने इस आयोजन के लिए बजट में 20 लाख रुपए का प्रावधान कर रखा है, लेकिन पर्व के अंतिम आयोजन मुरिया दरबार के दिन तक एक धेला प्रशासन को नहीं मिला था।

बस्तर के इस अनूठे पर्व को देखने देश-विदेश से सैकड़ों पर्यटक हर साल आते हैं। इस साल 12 अगस्त को पाटा जात्रा विधान से बस्तर दशहरा शुरू हुआ था। दशहरा कमेटी के अध्यक्ष बलीराम कश्यप ने बताया कि बुधवार को वे इस बारे में राज्य शासन के संस्कृति एवं धर्मस्व विभाग से बात करेंगे। आयोजन के लिए कलेक्टर फंड से पैसा उधार लिया गया।

तहसीलदार तथा दशहरा कमेटी के सचिव ओपी धाभाई के मुताबिक शासन से मिलने वाले 20 लाख रु. दशहरा शुरू होने के सप्ताह भर के भीतर बस्तर कलेक्टर को मिल जाते थे। इस साल राशि नहीं आने से नगदी खरीदी में परेशानी हुई।

दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष तथा विधायक लच्छूराम कश्यप ने कहा कि राशन, कपड़ा, पटाखे, साग-सब्जी, बकरा, शराब सहित सभी विधानों में लगने वाला जरूरत का सामान उधार में लिया गया है। राशि आने पर उधार का चुकारा किया जाएगा।

मांझी, चालकियों का मानदेय नहीं पहुंचा
तहसील कार्यालय में मौजूद अनेक मांझी, चालकियों ने भास्कर को बताया कि उनको मिलने वाले मानदेय का पैसा भी सरकार से अब तक नहीं मिला है। 80 मांझियों को 6 हजार के मान से 4 लाख 80 हजार रुपए मिलना है। इसी तरह 21 चालकी को 3600 के मान से 75 हजार बांटा जाना है।

सरकार की तरफ से हर मांझी को प्रतिमाह 500 और चालकी को 300 रुपए मानदेय दिया जाता है। करीब साढ़े 5 लाख रुपए की यह कुल राशि शासन से मिलने वाले 20 लाख रुपए के आबंटन के अतिरिक्त होती है। माता दंतेश्वरी की विदाई के समय इसका भुगतान किया जाता है।

बोंगू मांझी, बलराम मांझी तथा मंगलू मांझी ने कहा कि दशहरा के समय 2 सप्ताह तक सेवा देने वाले इसी आस में रहते हैं कि उन्हें एकमुश्त 6 हजार मिलेंगे। आज की स्थिति में उन्हें समय पर मानदेय मिल सकेगा, इसमें संदेह है। मांझी और चालकी इस साल 27 अक्टूबर को अपने गांव लौटेंगे, उससे पहले उनको राशि मिल जानी चाहिए।

पुजारी, सेवादार भी वंचित
धर्मस्व विभाग छत्तीसगढ़ शासन से पुजारियों और सेवादारों को दी जाने वाली राशि भी नहीं पहुंची है। पिछले जून माह से अक्टूबर तक 5 माह का पैसा नहीं आने से पुजारी, राउत और सेवादार भी निराश हैं।

बताया गया है कि पुजारी को 750 रुपए प्रतिमाह यानी 5 माह का 3750 रुपए मिलना है। 16 मंदिर के 16 पुजारी राशि मिलने का सपना देख रहे हैं। इसी तरह सेवादार, राउत को 500 रुपए प्रतिमाह सरकार से सेवा शुल्क के रूप में मदद मिलती है।

दूसरे मद से नगद खरीदी
राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि इस साल करीब डेढ़ लाख रुपए के बकरे खरीदे गए। पर्व की विभिन्न रस्मों में 75 से 80 बकरों की बलि दी जाती है। बकरा सप्लायर को 50 हजार रुपए का ही भुगतान किया गया है।

छोटी-मोटी नगदी खरीदी में भी तहसील में जमा दूसरे मद की राशि से की गई है। अब बजट आने पर ही सबका भुगतान हो सकेगा। उपाध्यक्ष लच्छूराम कश्यप ने कहा कि अगले साल से दशहरा शुरू होने के पहले 20 लाख की रकम मिल जाए इस बात के लिए पहल की जाएगी।





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