इंदौर. सीबीआई ने 600 करोड़ के पेट्रोलियम घोटाले की लंबी छानबीन के बाद जांच करने से इंकार करते हुए मामला राज्य सरकार को लौटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक अंतरराज्यीय स्तर पर ही मामला इतना कमजोर कर दिया गया कि सीबीआई ने इसे जांच लायक ही नहीं माना। गृहमंत्री हिम्मत कोठारी जांच राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो से करवाने की बात कह रहे हैं।
दिग्विजयसिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में वर्ष 2000 में इंदौर से प्रकाश में आए इस घोटाले की जड़ें प्रदेश के कई जिलों के साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र में भी फैली हुई थीं। मामला उजागर होने के बाद शहर के पांच बड़े कारोबारियों को गिरफ्तार किया गया था। अलग-अलग स्तर पर हुई जांच के बाद प्रदेश सरकार ने यह मामला सीबीआई को भेज दिया था।
विभागीय सूत्रों के अनुसार दो-तीन साल जांच के बाद सीबीआई के हाथ लगे दस्तावेजों से यह बात सामने आई कि जिस पेट्रोलियम प्रोडक्ट को ‘सी’ फार्म में गड़बड़ी बताकर महाराष्ट्र और गुजरात से यहां लाकर बेचा गया था उस पर वहां की सरकारों ने लोकल टैक्स जमा करवा लिया।
इसके चलते प्रदेश के वाणिज्यकर विभाग को यह साबित करना मुश्किल हो गया कि वहां बेचा जा चुका माल मध्यप्रदेश में कैसे आ सकता है। मामले की छानबीन के लिए सीबीआई इंदौर भी आई थी और यहां भी सारे दस्तावेज लेकर गई।