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Madhya Pradesh
Gwalior Gwalior ग्वालियर. हेलमेट लगवाओ अभियान की चेकिंग के दौरान चौराहों पर सड़क जाम के साथ ही अफरा-तफरी मची रही। पुलिस का हेलमेट अभियान मंगलवार की सुबह अचानक प्रारंभ हो गया। इस बार गांधीगिरी गायब थी और अभियान पूरी तरह से सिपाही और हवलदारों के भरोसे छोड़ा गया था। आला-अफसरों के निर्देश के बाद पुलिस कर्मियों ने हर चौराहे पर स्टॉपर लगाकर चेकिंग शुरू की और हेलमेट न लगाने वालों की लंबी-लंबी कतारें भी लगवा लीं।
सड़क पर पुलिस की बाबूगिरी से लगा जाम
पुलिस ने मंगलवार की सुबह बिना हेलमेट लगाए वाहन चला रहे लोगों को रोका और चौराहों पर ही उनकी कतार लगवा दी। कतार लगवाए जाने से यातायात बाधित हुआ लेकिन इसका चेकिंग करने वाले सिपाहियों पर असर नहीं हुआ। उन्होंने कतार में खड़े लोगों के चालान क्रमबद्ध तरीके से काटे।
इसमें खास बात यह रही कि चेकिंग में तैनात पुलिसकर्मियों ने कतार लगने का इंतजार किया, उसके बाद ही चालान काटने की प्रक्रिया शुरू की। जिन लोगों ने चालान काटने की जल्दी मचाई, उन्हें पुलिसकर्मियों की दुत्कार ही सहना पड़ी।
पुलिस द्वारा लगाए गए इस जाम के कारण सबसे ज्यादा अफरा-तफरी सराफा बाजार जैसे व्यस्ततम मार्ग पर रही। पुलिसकर्मियों ने महाराज बाड़ा से गश्त का ताजिया क्षेत्र तक तीन स्थानों पर स्टॉपर लगाकर यातायात को जाम किया।
अफसर रहे दफ्तर में
मंगलवार को शुरू हुए हेलमेट अभियान में खास बात यह थी कि इसका संचालन टीआई और सीएसपी ने अपने दफ्तर में बैठकर किया। वे सड़क पर नहीं आए और मैदानी स्टाफ ने इसका फायदा उठाया। उन्होंने अपने तरीके से पूरे अभियान को चलाया।
पुलिसकर्मियों ने कहीं स्टॉपर लगाए तो कहीं खुद ही बीच सड़क पर खड़े हो गए, जिन वाहन चालकों ने पुलिसकर्मियों से बचकर भागने की कोशिश की, उनके वाहन के आगे डंडा अड़ाकर रोकने में भी गुरेज नहीं की।
जनाब, आप भी तो हेलमेट लगाइए
मंगलवार को जिन पुलिसकर्मियों को चेकिंग के लिए लगाया गया था, उनमें से अधिकतर चेकिंग स्थल पर बिना हेलमेट वाहन चलाकर पहुंचे थे। खुद हेलमेट न लगाने वाले इन पुलिसकर्मियों ने दो घंटे तक लोगों को हेलमेट लगाने की नसीहत दी लेकिन खुद अपने वरिष्ठ अफसरों के आदेश का मजाक उड़ाते रहे।
उल्लेखनीय है कि एसपी वीके सूर्यवंशी ने फरमान जारी किया था कि जो पुलिसकर्मी बिना हेलमेट वाहन चलाता पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन मनमानी पर आमदा पुलिसकर्मी उनका भी आदेश मानने को तैयार नहीं हैं।