अमृतसर. एड्स एक ऐसी बीमारी है, जिसका दुनिया में कहीं इलाज नहीं है। अफ्रीका की गोद से जन्मी यह बीमारी पूरे विश्व में पैर पसार चुकी है। एड्स के मरीजों
की संख्या के मामले में भारत का विश्व में दूसरा नंबर है। तेजी से बढ़ रही इस बीमारी की रोकथाम के लिए वल्र्ड हैल्थ आर्गेनाइजेशन (डब्लयूएचओ) ने नई गाइड लाइन जारी की है। इसके अनुसार अब डाक्टर मरीजों को एचआईवी टैस्ट के लिए तब तक मोटिवेट करेंगे, जब तक पेशेंट टैस्ट कराने से खुद इंकार नहीं कर देता। इस बात की जानकारी पीपल हैल्थ आर्गेनाइजेशन के महासचिव डा. अशोक गोयल ने दी।
पहले टैस्ट था पेशेंट ओरिएंटिड
उन्होंने बताया कि इससे पहले एड्स टैस्ट पेशेंट ओरिएंटिड था। टैस्ट कराना या न कराना पेशेंट पर निर्भर था, लेकिन अब डब्लयूएचओ की नई गाइड लाइन के अनुसार सरकारी अस्पतालों, प्राइमरी हैल्थ सैंटरों आदि में आने वाले मरीजों को डाक्टर एचआईवी टैस्ट कराने के लिए मोटिवेट करेंगे। इसके अलावा मरीजों को एड्स से बचाव और इसके खतरनाक नतीजे के बारे में अवगत कराया जाएगा।
80 फीसदी मरीज बीमारी से अनभिज्ञ
डा. गोयल ने बताया कि डब्लयूएचओ ने उक्त गाइड लाइन दक्षिण अफ्रीका, भारत, बंगलादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए जारी की है। यहां के अधिकतर लोगों को पता ही नहीं कि उन्हें एड्स है। इनमें अफ्रीका पहले नंबर पर है। वहां महज 12 प्रतिशत पुरूषों और 10 प्रतिशत महिलाओं को ही पता है कि वे एचआईवी पाजिटिव हैं। दूसरा नंबर भारत का है। यहां के 80 प्रतिशत एड्स ग्रस्त लोग नहीं जानते कि वे एड्स का शिकार हैं। अमेरिका में 2५ प्रतिशत एड्स पीड़ितों को अपनी बीमारी का पता नहीं है।
गाइड लाइन के अनुसार भूटान, कीनिया, युगांडा, जांजिया, कैनेडा, थाईलैंड जैसे देशों में गर्भवती महिलाओं को अस्पताल में दाखिल करने से पहले उनका एचआईवी टैस्ट करना होगा। इन देशों में हर 100 महिलाओं के पीछे एक गर्भवती महिला एड्स पीड़ित है।
नहीं मिल पाती दवा
उन्होंने बताया कि भारत के लिए सबसे बड़ी बदकिस्मती यह है कि यहां मात्र तीन प्रतिशत मरीजों को ही एड्स की दवा मिल पाती है। कीनिया इस मामले में नंबर पर एक है, जहां 44 प्रतिशत लोगों को दवा मिल रही है। अमेरिका में 32 प्रतिशत, नाइजीरिया में 26 प्रतिशत लोग एड्स की दवा का फायदा उठा पाते हैं।