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दान दिया, नाम की चाहत नहीं

होशियारपुर. पांच दशक पहले रोजी-रोटी की तलाश में वे विदेश गए थे। वहां एक मेम से शादी की और फिर कुछ समय के लिए मातृभूमि लौटे भी, पर उन्हें यहां से वापस जाना पड़ा। उम्रभर उन्हें अपना गांव याद रहा। उन्होंने वसीयत तैयार की कि उनकी तमाम उम्र की कमाई से उनके गांव में एक अस्पताल बनाया जाए, लेकिन उनका नाम जाहिर न किया जाए।

यह गांव कंधोला जट्टां के एनआरआई दंपती की हकीकत है। ब्रिटेन से आए रोटरी क्लब के सदस्यों ने बताया कि वसीयत के मुताबिक दान देने वालों का नाम जाहिर नहीं किया जाएगा। मरने से पहले दानकर्ता ने वसीयत में ऑक्सब्रिज के रोटरी क्लब को यह हक दिया कि उनका पैसा उनके गांव तक ले जाए। बाद में उनकी बीवी ने अपने इंतकाल से पहले पति की वसीयत की ताईद कर दी।

ब्रिटेन से आए लोगों ने दी जानकारी
मंगलवार को ब्रिटेन के ऑक्सब्रिज से आए रोटरी क्लब सदस्यों जॉन क्लेमेंस और एंड्रयू पीटर ने होशियारपुर के रोटरी क्लब के पूर्व जिला गवर्नर सुरेंद्र सेठ से मिलकर होशियारपुर के डीसी डी.के. तिवारी से मुलाकात कर वसीयत की जानकारी दी। डीसी ने यकीन दिलाया कि प्रशासन इस पुनीत कार्य में पूर्ण सहयोग देगा। गांव की पंचायत से हुई चर्चा के बाद सरपंच उदय सिंह ने वहां अस्पताल बनाने के लिए दो एकड़ पंचायती जमीन देने का आश्वासन दिया। सदस्यों ने इलाके के विधायक मंगत सिंह संगतियां से भी मुलाकात की और उनका सहयोग मांगा।





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