नई दिल्ली. परमाणु करार पर वामदलों के तीव्र विरोध से परेशान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि खंडित जनादेश के बाद बनने वाली सरकारें अंतरविरोधों से
घिरी रहती हैं। इस बीच, वामदलों ने तीसरे मोर्चे के साथ बैठक की। तीसरे मोर्चे ने मांग की कि संसद में पारित होने के बाद ही करार लागू किया जाए।
यहां मैककिन्से बोर्ड ऑफ इंडिया की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राजनीति और सरकार को मिले अधूरे जनादेश के कारण मनमाफिक तरीके से काम नहीं किया जा सकता।’ हालांकि प्रधानमंत्री ने करार का जिक्र नहीं किया, पर वाम मोर्चे की ओर से हो रहे विरोध को देखते हुए इस बयान का मतलब साफ हो जाता है।
गुजरात चुनाव के पहले संसद सत्र!
केंद्र सरकार दिसंबर में होने वाले गुजरात चुनाव के पहले अगले माह संसद का एक संक्षिप्त सत्र आयोजित करने पर विचार कर रही है। दो सप्ताह के इस प्रस्तावित सत्र में भारत-अमरीका परमाणु करार पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सामान्यत: संसद का शीतकालीन सत्र नवंबर के तीसरे सप्ताह से शुरू होकर क्रिसमस के पहले खत्म होता है।