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थाना पुलिस पर रेड

चंडीगढ़. सोमवार को थाना-३९ पुलिस करीब आठ लाख की चीटिंग की शिकायत की जांच करती पाई गई। इसी मामले में पुलिस पर हाईकोर्ट में सेक्टर-३८ निवासी बलकार सिंह ने आरोप लगाया कि सुबह से पुलिस ने उसके भाई बिजनेसमैन वरिंदर सिंह को अवैध हिरासत में रखा है और पैसों की वसूली के लिए दबाव बनाया जा रहा है।

इस पर हाईकोर्ट ने अपने वारंट अफसर को तैनात कर, थाना-३९ में रेड करवाई। शाम पांच बजे जब वारंट अफसर ने थाने में रेड की तो आरोप सही निकले और वरिंदर सिंह थाने में पाया गया। उसे वारंट अफसर ने छुड़वाया और पुलिस की कारगुजारी की रपट उनके ही थाने के रोजनामचा रजिस्टर में दर्ज की।

बलकार ने बताया कि उनका गुरदासपुर के बलराज सिंह, अवतार सिंह और बोपाराय से बिजनेस डिस्पयूट है। इस पर थाना-३९ का एक हेड कांस्टेबल और दो कांस्टेबल पहले बलकार के घर पहुंचे। वह वहां नहीं मिला तो वे से.-३८ मार्केट में उनके ऑफिस पहुंचे।

इस पर पुलिस वाले ऑफिस से उनके भाई वरिंदर को सुबह ११ बजे एक प्राइवेट कार में बैठाकर ले गए। कार में उनके साथ दूसरी पार्टी भी मौजूद थी। उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की और वारंट अफसर ने रेड मारकर वरिंदर को छुड़वाया।

इस मामले की अगली डेट हाईकोर्ट के जस्टिस आशुतोष मोहंता की कोर्ट में २९ अक्टूबर लगी है। बलराज का आरोप है कि पुलिस भाई को हिरासत में लेकर उस पर दबाव बनाकर पैसों की वसूली करना चाहती थी।

पुलिस का तर्क:
मामले पर थाना-३९ प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश शुक्ला ने बताया, बलराज और वरिंदर के खिलाफ उनके पास साढ़े सात लाख रुपए के गबन की शिकायत है। इसी सिलसिले में उन्हें बुलाया गया था। पांच बजे जब वारंट अफसर ने थाने में रेड की उससे कुछ मिनट पहले ही खुद वरिंदर अपने आप थाने पहुंचा। यह सारी साजिश है।

कैमरे में कैद पुलिस का सच और झूठ :
पुलिस कितना सच बोल रही है, वरिंदर को सुबह थाने पुलिस लेकर आई, या फिर पौने पांच बजे शाम को वह खुद थाने पहुंचा। इस सारे पहलू की सच्चई थाने के सीसीटीवी में मौजूद है, जिसकी जांच के बाद सारे पहलू का खुलासा खुद ही हो जाएगा।

पूर्व आईजी के आदेश
पूर्व आईजी राजेश कुमार ने आर्डर किए थे कि दो लाख रुपए से ज्यादा की चिटिंग के मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा करेगी, न कि थाना पुलिस। तब से दो लाख से ऊपर की चीटिंग के मामलों की जांच आर्थिक अपराध शाखा में जाने लगी।





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