bhaskar Web English
HomeNewsRajasthanKota Kota

कॉलोनी के हर घर का नम्बर ‘223’

कोटा. हर घर की पहचान उसके नम्बर से होती है। अगर आपको किसी कॉलोनी में अपने परिचित का घर नम्बर के आधार पर तलाशने के लिए कहा जाए तो colonyयह आपके लिए एक आसान कार्य होगा, पर यह कार्य मुश्किल तब होगा जब वही नम्बर एक से अधिक घरों का होगा। चाहे हर घर का नम्बर एक होता हो पर कोटा में एक ऐसी कॉलोनी है, जहां के सभी घरों का नम्बर एक ही है। गुमानपुरा की न्यू कॉलोनी के एक क्षेत्र के सभी घरों का नम्बर 223 है जहां लगभग 150 घर बने हुए हैं। वोटर लिस्ट में भी सभी घरों का नम्बर यही दर्ज है।

उपनाम बनें मददगार
इतने घरों का एक ही नम्बर होते हुए भी लोगों को परेशानी नहीं होती है। कॉलोनी के निवासी कहते हैं कि अब उन्हें आदत हो गई है। वे यहां कई सालों से रह रहे हैं। नम्बर एक होने के कारण सबको उनके उपनाम से जाना जाता है। जैसे मंत्रीजी, सोनीजी और शर्माजी का परिवार। कॉलोनी में मंत्री परिवार के दो घर होने के कारण बड़े भाई के घर को बड़े मंत्री और दूसरे को छोटे मंत्री के घर से जाना जाता है। कुछ लोगों ने नाम के अलावा घर के उपनाम भी रख लिए हैं। एक ही नम्बर होने के कारण लोगों में आपसी जुड़ाव भी है तो एक दूसरे के लिए आत्मीयता भी। घरों का नम्बर एक होना इसके लिए एक अनूठा अनुभव हैं।

जब चिट्ठी पहुंची दूसरे घर
सब घरों का नम्बर एक होने के कारण परेशानी तो होना स्वभाविक है। डाकिए को डाक बांटने में परेशानी झेलनी पड़ती है तो बाहर से कोई आता है तो वह घर तलाशने में घूमता रहता है। कॉलोनी की निवासी सारिका का कहना है कि उन्होंने शादी से पहले अपने पति को कार्ड और खत लिखे। पर सभी घर का नम्बर एक होने के कारण वे कार्ड किसी दूसरे घर पहुंच गए। उसके बाद जो हालत हुई, वह देखने लायक थी।

कई बार बजती है घर की घंटी
स्टूडेंट अंकिता का कहना है कि मेरा घर कोने का होने के कारण ज्यादा परेशानी हमें ही होती है। जब भी कोई मकान तलाशने आता है, हमारे घर की घंटी ही बजाता है। इसलिए एक दिन में कई बार ऊपर नीचे के चक्कर हो जाते हैं।

घर तलाशने में लगा समय
गायत्री मंत्री ने कहा कि हमें तो आदत हो गई है। लोगों के लिए परेशानी का विषय हैं। एक बार बाहर से मेहमान आए थे। उन्हें हमारा घर तलाशने में बहुत ज्यादा वक्त लग गया।

क्या कहते है लोग
* ‘बरसों बीत गए यहां रहते हुए पर छोटी मोटी परेशानियों को छोड़कर कोई बड़ी दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। यहां सब लोग मिलजुलकर रहते है।’
-डॉ. घनश्याम सोनी, क्षेत्रवासी

* ‘पिछले 35 सालों से यहां रह रहे है। अब तो इतनी आदत हो गई है कि अजीब नहीं लगता है। अगर घर का नंबर बदल जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।’
-हरजीत दिंगड़ा, गृहणी

* ‘मेरे परिवार को यहां रहते हुए 60 साल हो चुके है। यह कॉलोनी तो सब जगह प्रसिद्ध है। मुझे तो गर्व होता है कि मैं यहां रहता हूं।’
-मोहनसिंह, क्षेत्रवासी

* ‘एक घर की डाक दूसरे घर चली जाती है। कई बार डाक देर से मिलती है। मेहमानों को भी आने में परेशानी होती है।’
-निरंजना शर्मा, गृहणी

* ‘यह पूरी भूमि मेरे पिता की थी। जमीन का रजिस्ट्रेशन नम्बर 223 था। तब से सभी घरों का नम्बर यहीं है। लोगों को परेशानी नहीं होने के कारण इसे बदलने की कोशिश नहीं की गई।’
-पंडित श्यामसुंदर शर्मा

* ‘यह कालोनी नगर निगम को ट्रांसफर की गई थी। पंडित रामस्वरूप शर्मा का यह एक ही प्लाट था, जिसका नंबर 223 था। इसके बाद बने घरों के नंबर 224 और इसी तरह आगे का क्रम है। अब उस प्लाट का नंबर तो बदला नहीं जा सकता। या तो 223ए, बी व सी कर लेना चाहिए, जिससे पहचान अलग हो जाए।’
- सतीश बारूपाल, आयुक्त, नगर निगम





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: