उदयपुर.
यहां महाराणा भूपाल राजकीय अस्पताल के बाल चिकित्सालय में एक विचित्र शारीरिक संरचना के शिशु को उपचार के लिए लाया गया जो जननेंद्रिय विहीन है।
बाल चिकित्सा विशेषज्ञों को हैरत में डालने वाले इस नवजात का जन्म छह दिन पहले नीमच के शासकीय अस्पताल में हुआ था। शिशु की विकृति को देख वहां डाक्टर कुछ समझ नहीं पाए। लिहाजा नवजात को उपचार के लिए उदयपुर रेफर कर दिया गया। 18 अक्टूबर रात में यहां नर्सरी में सीनियर रजिस्ट्रार डा. जावेद अहमद ने दाखिल किया।
बाल चिकित्सालय विभागाध्यक्ष प्रो. एस. एल. मण्डोवरा ने बताया कि विश्व में अब तक इस किस्म के 75 बच्चों का जन्म हुआ है। इंडियन मेडिकल पेट्रियाडिक्ट्स जर्नल के मुताबिक भारत में इससे पहले इस तरह के केवल एक शिशु का जन्म हुआ था। इस रोग को एफेलिया कहते हैं। जननांग न होने के बावजूद शिशु की अन्य गतिविधियां सामान्य है। वह मलद्वार से ही मल-मूत्र का त्याग कर रहा है। इसका पता सिस्टो यूरोथ्रोग्राफी से लगाया गया है। शिशु के मूत्राशय (ब्लेडर) का संबंध मलद्वार (रेक्टम) से होना पाया गया है। शिशु के जननांग का स्थान सपाट है किन्तु उसके दोनों अंडकोष पूर्ण रूप से विकसित हैं।
डा. मण्डोवरा का कहना है कि विदेशों में इस प्रकार के केसेज में अण्डकोष निकाल कर सर्जरी से मूत्र नली का द्वार बाहर निकाल दिया गया। उन्हें महिलाओं की भांति जीवन बिताने के लिए वेजिनो प्लास्टि ऑपरेशन कर दिया गया। ऐसे बच्चों के गुणसूत्र 46-एक्स वाय ही रहते हैं जबकि महिलाओं में गुणसूत्र 46-डबल एक्स होते हैं। बच्चे का पिता दशरथसिंह व मां गुड्डी देवी उसके भविष्य को लेकर परेशान हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों ने दंपती को सलाह दी है कि वे चाहें तो किसी महानगर के अस्पताल में बच्चे को ले जाकर ऑपरेशन से महिलाओं के समान जननांग विकसित करा लें। यह ऑपरेशन बालक के पैदा होने के 10 से 60 दिनों के भीतर कराया जा सकता है। बच्चे के माता-पिता पसोपेश की स्थिति में पिछली रात बालक को अस्पताल से डिस्चार्ज कराए बिना ले गए।