Manoranjan
Cinema
Interviews Interviews मुंबई.
इस शुक्रवार पूरी तरह से 3डी एनीमेटेड फिल्म बाल गणेश सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। इसका निर्माण शेमारू इंटरटेनमेंट और अस्तित्व मीडिया विजन के बैनर तले किया गया है। बाल गणेश फिल्म और भारत में एनीमेशन फिल्मों के भविष्य पर हमने शेमारू इंटरटेनमेंट की वाइस प्रेसीडेंट स्मिता मारू से बात की:
बाल गणेश आखिर किस तरह की फिल्म है?
बाल गणेश पूरी तरह 3डी एनिमेटेड फिल्म है और इसे हमने बच्चों को ध्यान में रखकर बनाने का प्रयास किया है। इसके माध्यम से बच्चे मनोरंजन के साथ-साथ भगवान गणेश के बालरूप में की गई नटखट हरकतों को जान सकेंगे। आजकल के बच्चे वैसे भी पहले की अपेक्षा अपनी सांस्कृतिक विरासत को कम जानते हैं। फिल्म के जरिए वे भारतीय धार्मिक चरित्रों और उनके बालरूप से जुड़ सकेंगे। कुल मिलाकर हमने एक फन फिल्म बनाने का प्रयास किया है।
आम कार्टून धारावाहिकों से अलग आखिर क्या है बाल गणेश में? क्या यह बच्चों को अपील करेगा?
जो चीज चैनल पर नहीं मिल रही वो हमने फिल्म में लाने का प्रयास किया है। मनोरंजन प्रधान फिल्म बनाने की कोशिश की है जो बच्चों के साथ साथ बड़ों को भी पसंद आएगी। फिल्म के गीत काफी अच्छे बन पड़े हैं। जहां गीत के बोल काफी शुद्ध हैं, वहीं इनमें पाश्चात्य धुन का समावेश बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी पसंद आएगा।
अधिकांश एनिमेटेड फिल्में ईश्वर को केंद्र में रखकर बनाई जा रही हैं। क्या हमारे यहां कहानियों का अभाव है या कोई और बात?
ऐसा नहीं है कि हमारे यहां कहानियां नहीं हैं। हमारे यहां बाल गणेश प्रथम पूज्य देवता हैं और हमारे देश में लगभग हर खास मौके पर इनकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है। लोगों का इनसे गहरा जुड़ाव है, और इसी को ध्यान में रखकर हमने फिल्म बनाई है। अगर हम कोई नया चरित्र लेकर फिल्म बनाएं, तो सबसे पहले तो लोगों को उससे परिचित कराने में मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए एनिमेटेड फिल्म में बाल गणेश जैसे चरित्र के साथ फिल्म बनाना थोड़ा आसान हो जाता है।
लगता है कि आजकल अधिकांश एनिमेटेड फिल्में मल्टीप्लेक्स और शहरी बच्चों को ध्यान में रखकर बनाई जा रही हैं?
मैं मानती हूं कि भारत गांव में बसता है और हम जानते हैं कि उपभोक्ता के लिए क्या आवश्यक है। इस फिल्म का निर्माण हमने आम भारतीय बच्चे को ध्यान में रखकर किया है, और हम उन तक इस फिल्म को पहुंचाने के हरसंभव प्रयास करेंगे।
भारत में एनिमेशन फिल्मों के भविष्य को लेकर आप क्या सोचती हैं?
हमारे यहां एनिमेशन फिल्मों के निर्माण का यह शुरुआती समय है। हनुमान फिल्म के बाद संभावनाएं बढ़ी हैं। अब एनिमेशन फिल्म देखने के लिए लोग थियेटर जाना पसंद करने लगे हैं। हालांकि यह शुरुआत भर है, पर संभावनाएं काफी हैं।
फिल्मकार आम हिन्दी फिल्मों में एनीमेशन का इस्तेमाल करने लगे हैं। कुछ तो हीरो हीरोइन का एनीमेटेड रूप ला रहे हैं, तो कुछ फुल लेंथ की एनीमेशन फिल्म बनाने की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में क्या आपको लगता है एनीमेशन फिल्मों का डिजिटल युग एक्शन फिल्मों से आगे निकल जाएगा?
मुझे लगता है कि हमें इतंजार करना होगा। वैरायटी का होना जरूरी है। क्या एक चीज दूसरे चीज से आगे जा सकती है। इस बात को समय और दर्शकों पर छोड़ दीजिए ।
एनीमेशन फिल्म में लेखक की भूमिका को कितना महत्वपूर्ण मानती हैं?
मैं समझती हूं कि टैक्नोलॉजी को ध्यान में रखकर कहानी लिखना अहम है। इसलिए लेखक की भूमिका काफी अहम है। एनीमेशन फिल्मों में लेखक और एनीमेटर दोनों महत्वपूर्ण हैं। बाल गणेश के डायरेक्टर पंकज शर्मा ने फिल्म की विषयवस्तु पर उम्दा काम किया है ।
हमारी एनीमेशन टेक्नोलॉजी क्या अंतर्राष्ट्रीय बाजार का मुकाबला करने में सक्षम है?
दोनों जगह एनीमेशन फिल्मों में उपयोग में लाए जा रहे सॉफ्टवेयर वही हैं। फिल्म निर्माण में क्वॉलिटी महत्वपूर्ण है और यह बजट पर निर्भर करती है।
बाल गणेश फिल्म में क्या विशेष प्रयोग किए गए हैं?
बाल गणेश के नटखट चरित्र को एनीमेशन के जरिए बताने की कोशिश की गई है। बाल गणेश ने अपने बचपन में जो शरारतें कीं और दोनों भाईयों में कभी-कभी किसी बात को लेकर जो शरारतें होती थी उन्हीं पर फिल्म को बनाने का हमने प्रयास किया है।