सांवलियाजी/उदयपुर/जयपुर. दो दिनी भाजपा कार्यसमिति सत्ता के संतुष्टों और असंतुष्टों के बीच खटास के साथ खत्म हो गई। पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी
के आने पर भी दूसरे दिन पार्टी के 7 मंत्री, 7 प्रदेश पदाधिकारी, 17 सांसद और 40 विधायक बैठक से नदारद रहे। समापन सत्र में आडवाणी ने सत्तापक्ष और असंतुष्ट दोनों खेमों को नसीहतें दीं। उन्होंने कहा कि अच्छी और विकास करने वाली सरकार होने का अर्थ यह नहीं है कि चुनाव परिणाम हमेशा अच्छे ही आएं। उन्होंने असंतुष्टों को इंगित करते हुए कहा कि यदि परिवार के बीच में कोई झगड़ा है तो उसे बाहर नहीं ले जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री वसुंधराराजे ने भी असंतुष्ट खेमे पर निशाना साधा और कहा कि पहले पार्टियां आपस में लड़ती थीं, लेकिन अब परिवार के लोग ही लड़ रहे हैं। आडवाणी ने सत्ता और संगठन से भी कहा कि केवल विकास कार्यो के दम पर सत्ता में नहीं लौटा जा सकता। चुनाव में सरकार की छवि और संगठन के कामों का भी असर पड़ता है। भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सत्ता और संगठन में नेतृत्व की यह जिम्मेदारी है कि वह सभी को साथ लेकर चले। सबकी बात सुने और सभी को निष्पक्ष रूप से अपनी बात कहने का मौका मिले।
आडवाणी ने दोनों पक्षों को स्पष्ट रूप से कहा कि वे जुबान पर लगाम रखें। पार्टी की बातें परिवार में करें। किसी भी स्तर पर बाहर बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी कहा कि अनुशासनहीनता को सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे आज राजस्थान के नेताओं को कुछ कड़वी बातें कहना चाहते हैं।
उन्होंने कहा भूलिए मत, भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। जनसंघ के समय राजस्थान के 8 विधायक थे। इनमें से छह ने अनुशासनहीनता की तो जनसंघ ने राष्ट्रीय स्तर पर विचार करके छह लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया, लेकिन ये सिद्धांत की बात है। व्यावहारिक बात यह है कि पूरे परिवार को एक रखने के लिए कमियों को दूर किया जाए।
प्रदेश प्रभारी मुंडे ने वसुंधरा सरकार के मंत्रियों को सलाह दी कि वे कार्यकर्ताओं को ज्यादा महत्व दें। वे जयपुर को छोड़कर अपने इलाकों में जाएं और वहां कार्यकर्ताओं की पूरी बात सुनें। उन्हें सरकार की उपलब्धियां और पार्टी की रीति-नीति बताएं तथा उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करें।
चुनावी शंखनाद, धोनी और युवराज जैसे युवा मैदान में उतारने का फैसला
भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने शनिवार को यहां सांवलियाजी में चुनावी शंखनाद कर दिया। पार्टी ने सभी मंत्रियों और विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे अब राजधानी में रुकने के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों में निकल जाएं और रूठे कार्यकर्ताओं को मनाएं। भाजपा ने अगला विधानसभा चुनाव ट्वेंटी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप की तर्ज पर लड़ने और टीम में महेंद्रसिंह धोनी और युवराज जैसे जीत दिलाने वाले युवाओं को मैदान में उतारने का फैसला लिया है।
महिलाओं को ज्यादा टिकटों का संकेत
मुंडे ने कहा कि अगली बार पार्टी विधानसभा चुनाव में ज्यादा संख्या में महिला उम्मीदवारों को उतारेगी। इस पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि पिछली बार 11 प्रतिशत महिला उम्मीदवार थे, लेकिन इस बार यह संख्या इससे ज्यादा ही होगी। मुंडे ने कहा कि भाजपा महिलाओं को 30 प्रतिशत आरक्षण देने जा रही है। अगली कार्यकारिणी में भी 30 प्रतिशत स्थान महिलाओं को दिए जाएंगे।
भाभड़ा ने रखा असंतुष्टों का पक्ष
कार्यसमिति के दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने पूर्व उप मुख्यमंत्री हरिशंकर भाभड़ा से लंबी बात की। समझा जाता है कि भाभड़ा ने असंतुष्टों का पक्ष रखा और कहा कि मंत्रियों की छवि से पार्टी को नुकसान हो रहा है।
आडवाणी की नसीहतों का किसके लिए क्या मतलब
आडवाणी
* केवल विकास और अच्छे काम से हमेशा चुनाव नहीं जीते जा सकते।
* सरकार और पार्टी के लोग जुबान पर लगाम दें।
* पार्टी के नेता आपस में लड़ रहे हैं, बहुत खराब बात है, इससे छवि खराब होती है।
* अनुशासनहीनों पर कार्यवाही जरूरी, लेकिन पूरे परिवार को एक रखने के लिए कमियां दूर करें।
संतुष्टों के लिए
* विकास हुआ, ठीक है, पर चुनाव जीतने के लिए एक रहना होगा।
* है कोई माई का लाल, छठी का दूध याद दिला दूंगी, जैसी बात ना कहें।
* विवाद समाप्त करने के लिए प्रदेश नेतृत्व पहल करे और असंतुष्टों के खिलाफ कार्रवाई से बचें।
* असंतुष्टों की नाराजगी दूर करें और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को उचित स्थान दें।
असंतुष्टों के लिए
* चुनाव परिणाम उन्हें भी प्रभावित करेंगे।
* मुख्यमंत्री और साथी मंत्रियों पर आरोप न लगाएं और न ही छवि खराब करें।
* अनुशासनहीनता लगातार जारी रही तो असंतुष्टों के खिलाफ भी कार्यवाही हो सकती है।
* एकता बनी रहे, यह जिम्मेदारी केवल सत्ता पक्ष की नहीं है बल्कि असंतुष्टों को भी पहल करनी होगी।
आगे क्या
* असंतुष्टों को साथ लेकर काम नहीं किया तो चुनाव जीतना मुश्किल।
* किसी बदलाव की संभावना नहीं। दोनों पक्ष अड़े हैं, संभवत: अड़े ही रहेंगे।
* फिलहाल आपसी झगड़े बंद होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि कोई किसी को सुनने को तैयार नहीं।
* कार्यवाही संभव नहीं। कई बड़े नेता असंतुष्टों के साथ।
उदयपुर में होते हुए आडवाणी से मिले तक नहीं कटारिया
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया शनिवार को पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के बुलावे पर भी नहीं गए। बताया जाता है कि आडवाणी ने कटारिया को असंतुष्ट खेमे की बात सुनने के लिए बुलाया था। शनिवार को आडवाणी और कटारिया दोनों उदयपुर में थे फिर भी कटारिया उनसे मिलने नहीं पहुंचे।